कमल शुक्ला से मारपीट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो ….कल्याण संघ*

कमरून निशा


कांकेर में एक पत्रकार के साथ पहले मारपीट और उसके बाद थाने पहुंचे पत्रकारों में से अंचल के वरिष्ठ पत्रकार और न सिर्फ बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ , राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक अलग पहचान रखने वाले कमल शुक्ला के साथ जिस तरह की मारपीट कुछ लोगों ने की है , उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है .. छ ग श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ के सभी 28 जिलों के साथी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करते हैं

सवाल यह भी है कि क्या फर्क रहा पुरानी सरकार और वर्तमान सरकार में ..? ऐसी कई घटनाएं तो भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी हुई थी । पुरानी सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून और पत्रकारों की अन्य सुविधाओं के नाम पर पूरे 15 साल तक इस प्रदेश में राज किया । दुनिया भर के कानूनों में बदलाव किया , लेकिन पत्रकारों के लिए जो करना चाहिए था , सिर्फ वही नहीं किया । वर्तमान सरकार ने एक अच्छा काम अवश्य किया है कि रिटायर्ड पत्रकारों के लिए जो 5 हज़ार की सम्मान राशि भाजपा ने सिर्फ 5 साल के लिए तय की थी , उसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 10 हज़ार रुपए आजीवन कर दिया । पिछले चुनाव में अपने घोषणा पत्र में कांग्रेस ने समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कुछ नया करने का बीड़ा उठाया था , उससे ऐसा लग रहा था कि इस बार कुछ नया होगा , खास तौर से पत्रकारों के लिए , लेकिन आज कांकेर में कमल शुक्ला तथा एक अन्य पत्रकार के साथ घटित घटना ने पूरी पत्रकार बिरादरी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या प्रदेश सरकार से ऐसे ही बदलाव की अपेक्षा थी ?
कमल शुक्ला के साथ हुई मारपीट को लेकर पूरे प्रदेश ही नही , बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आने लग गई हैं जो इस बात का संकेत है कि इस मामले में सारे पत्रकार एक है । लेकिन प्रदेश सरकार ने मीडिया से संबंधित जिन लोगों को अपने सलाहकार मंडल में रखा है , अभी उनकी प्रतिक्रिया आनी बाकी है , जो यह तय करेगा पत्रकारों के प्रति सरकार का रुख वास्तव में क्या है । कांकेर की घटना को किसी भी तरह से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता, छत्तीसगढ़ का एक एक पत्रकार ऐसी घटना की निंदा करता है ।अब गेंद प्रदेश सरकार के पाले में हैं कि इतनी बड़ी घटना को लेकर वह क्या कदम उठाती है ? क्या पत्रकारों के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की हिमाकत को माफ किया जा सकता है ? ये सब ऐसे सवाल है जिनके जवाब का पत्रकार बिरादरी को इंतजार है ।देखते हैं कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल इस घटना को अपने संज्ञान में लेकर किस तरह का न्याय करते हैं ..? या फिर न्याय के लिए पत्रकारों को खुद ही सामने आना पड़ेगा…?
बी डी निज़ामी विजय लांडगे
प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश महासचिव

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