बैकुंठपुर जामपारा समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह ने बताया की नियमित रूप से हो रही धान खरीदी

कमरून निशा

जिला कोरिया खबर आईना न्यूज़ के संवाददाता ने जब समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह से बात की तो उनके द्वारा बताया गया की इस साल धान खरीदी के आंकड़े इस प्रकार है धान खरीदी हो रही है
धान खरीदी/42410.00
धान का उठाआे/23960.00
बाकी बचा समिति में/18450.00

वर्तमान भूपेश सरकार जो किसानो का एक- एक दाना धान खरीदने की बात करती है जिसका उदाहरण इस प्रकार है आदिम जाति सेवा सहकारी बैकुंठपुर जाम पारा समिति मे देखने को मिला जहां किसान भारी संख्या में पहुंच रहे हैं और अपने धान को बड़ी आसानी से बेच पा रहे हैं आपको बता दें कि भूपेश सरकार के द्वारा किसानों की धान खरीदी की तारीख 1 दिसंबर 2020 से 31 जनवरी 2021 तक रखा गया है इस बीच किसानों में काफी उत्साह देखा जा रहा है किसान बड़ी आसानी से समितियों में आकर धान बेच रहे हैं भूपेश सरकार के द्वारा धान खरीदी केंद्र की संख्या बढ़ाने से किसानों को धान बेचने में राहत मिली है ऐसे ही एक समिति बैकुंठपुर जामपारा की बात की जाए तो वहां के समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह ने बताया कि समिति प्रबंधक के द्वारा किसानों को मास्क भी दी जा रही है वही समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए धान की खरीदी की जा रही है किसी भी किसान को या कर्मचारी को बिना मास्क लगाएं धान खरीदी केंद्रों में आ जाते हैं तो उसे समिति के द्वारा मास्क भी दिया जा रहा है ताकि सोशल डिस्टेंस का पालन हो सके ताकि कोरोना महामारी से बच सके धान खरीदी समिति में एक परेशानी सभी समिति वालों को कोरिया जिला में हो रही है धान का बोरा फटा हुआ आया है धान खरीदी समिति में बोरो की कमी खल रही है सभी समिति प्रबंधक परेशान है। किसान को भी फिफ्टी परसेंट बोरा देना पड़ेगा और उतना ही बोरा समिति के द्वारा दिया जा रहा धान को बोरों में भरने के लिए। किसानों को पर बाेरा के हिसाब से ₹15 दिया जाएगा जो किसान अपना बोरा धान भरने में लगाया हुआ है।

समिति के सारे स्टेट भर चुके हैं एवं समिति में आगे खरीदी करने के लिए जगह का अभाव हो चुका है।। ऐसे में आगे की खरीदी कर पाना समिति के कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।। धान के उठाओ ना होने से कई प्रकार की समस्याओं का सामना समिति में कार्यरत कर्मचारियों को करना पड़ेगा।। धान के वजन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा एवं चूहों एवं दिमग से धान को सुरक्षित रख पाना बहुत बड़ी समस्या है।

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