तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर मे अधिकारी की नहीं बाबु साहब की चलती है मनमानी तहसील ऑफिस में नाम ही नहीं तहसील का ना कोई बोर्ड भी नही।

kamrun nisha

तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर मे अधिकारी की नहीं बाबु साहब की चलती है मनमानी तहसील ऑफिस में नाम ही नहीं तहसील का ना कोई बोर्ड कुछ भी नहीं

बैकुण्ठपुर। तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर मे इनदिन गजब का रवैया चल रहा है, यहां पहूंचनें वाले पक्षकारों को एक काम के लिऐ वर्षों चक्कर लगानें को मजबुर होना पडता है। आपको बताते चलें कि बैकुंठपुर तहसील कार्यालय में जो फरियादी पक्ष कार सुबह आते हैं अपने पेसी दिनांक
मे उन लोगों को लगातार समय पर समय देकर साल 2 साल तक घुमा दिया जाता है, लेकिन
भू-माफियाओं के लिए तहसील कार्यालय रात 8:00 से 8:30 बजे तक खुला रहता है, दिन में यहां के कर्मचारी अपनी मनमानी करते नजर आते हैं तहसील बैकुंठपुर के अधिकारी वहां के कर्मचारियों को लगातार आदेशित करते रहते हैं किंतु कर्मचारी अपने मन से कार्य करते हैं अधिकारी के आदेश को दरकिनार किया जाता है। शहरी क्षेत्र व आसपास के ग्रामीण जो पट्टा विभाजन, फावती व नामांतरण करवाना चाहते हैं वह लोग सुबह से आकर शाम 5;30 बजे शाम तक बैठे रहते हैं लेकिन उनकी फाइल किसी प्रकार से दबा कर रखी जाती है जो लोग पैसे देते हैं उन लोगों का कार्य किया जाता है, तहसील कार्यालय में सैकड़ों मामले लंबित मामले नामांतरण, सीमांकन, फावती, बटवारा व फर्जी रजिस्ट्री के केश लगे है। अधिकारी के द्वारा तो कर्मचारियों को आदेशित किया जाता है कि, समस्त कार्य को समय सीमा मे निराकरण करें, किंतु जो नीचे बैठे रहते हैं कर्मचारी उनके द्वारा लगातार सुबह, शाम, मंगलवार सोमवार, कल, परसों बोल कर दो से 3 साल मामले को दबा कर रखा जाता है। यदि कोई दक्षिणा दे दिया तो उनका कार्य महज 2 घंटे में ही हो जाता है। तहसील कार्यालय मे कार्य किस प्रकार कुछ लिपिक करते हैं इसकी जानकारी भी खुद कलेक्टर कुलदीप शर्मा को है क्योंकि उनके पास भी कई मामले जा चुके हैं जिस पर त्वरित कार्यवाही भी हुई और लोगों ने कलेक्टर कुलदीप शर्मा को बधाई भी दी। उनमें से एक किसान ने तो कलेक्टर कोरिया से आवेदन किया कि वह लगातार 4 वर्षों से सीमांकन के लिए परेशान है जिसका कार्य अब तक नहीं किया जा रहा है इसकी जानकारी मिलते ही कलेक्टर कुलदीप शर्मा के द्वारा आदेश करने पर महज 4 घंटे में ही सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया गया जो 4 वर्षों में नहीं हो सका था। किसान भी
कलेक्टर कोरिया को धन्यवाद ज्ञापित किया था। सूत्रों माने तो एक मामला 2018 से तहसील कार्यालय में चल रहा है यहां के लिपिक के पास भी वर्तमान सत्र में यह प्रकरण चल रहा है इस प्रकरण में तहसीलदार बैकुंठपुर के द्वारा दिनांक आगे पिछे हो सकता है, एक अंदाजन 6 अप्रैल 2022 को उक्त प्रकरण में फाइनल डिसीजन तहसीलदार बैकुण्ठपुर के द्वारा दिया गया था। किंतु फाइनल डिसीजन को टाइप करने में तहसील बैकुण्ठपुर मे पदस्त लिपिक(रीडर) को 3 माह लग गया आदेश टाईप करनें में इस दौरान लिपिक को तहसीलदार बैकुण्ठपुर नें 20 से 25 बार आदेश दिये की आदेश को जल्दी टाईप कर जमा करों किन्तु लिपि के कानों मे जूं तक नहीं रेंगी और लगभग तीन माह बितने के बाद भी आदेश को टाईप कर जमा नहीं किया गया। उक्त लिपिक का तहसील बैकुण्ठपुर से दो बार तबादला भी हो चुका है लेकिन तहसील बैकुण्ठपुर से बाबु साहब का मोह भंग नहीं हो रहा है या यूं भी कह सकते है कि आम आदमियों को गोल गोल घुमानें और भू-माफियाओं का कार्य आधी रात तक कार्य कर झोली भरनें मे मजा आ रहे है। इनके रवैये के कारण अपनें कार्य मे ईमानदार, उर्जावान तसहीलदार मनहरण सिंह राठिया की छबी भी धुमिल होता ती जा रही है। एक प्रक्रण मे शासकीय कर्मचारी जो महिला है वह अपनें कार्य के लिए महिनों से चक्कर लगा लगा कर व शासकीय कार्य से छुट्टी लेकर आ रही है किन्तु अब तक उस कार्य के लिए एक आदेश तक लिपिक के द्वारा नहीं बनाया गया है ता कि उस जमीन का सीमांकन हो सके। हलाकि उक्त लिपिक की शिकायत कलेक्टर कोरिया से की गई है अब देखना होगा की क्या कार्यवाही होती है।

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