कोरियाछत्तीसगढ़

करमा की लय और मांदर की थाप पर थिरका राज्योस्थल, लोकगीतों ने जगाई उमंग। राज्योत्सव में सांस्कृतिक रंगों की छटा, करमा, ददरिया, पंथी और सूफी गीतों ने दर्शकों को मोहा

kamrun nisha.

करमा की लय और मांदर की थाप पर थिरका राज्योस्थल, लोकगीतों ने जगाई उमंग

राज्योत्सव में सांस्कृतिक रंगों की छटा, करमा, ददरिया, पंथी और सूफी गीतों ने दर्शकों को मोहा

कोरिया, 03 नवम्बर 2025/ तीन दिवसीय राज्योत्सव के दूसरे दिन राज्योस्थल लोकनृत्य और लोकसंगीत की सतरंगी आभा में डूबा रहा। राज्य की 25 वर्षों की विकास यात्रा को करीब से अनुभूत करने पहुँचे जिलेवासियों ने यहाँ संस्कृति की जीवंत धड़कन को महसूस किया। मांदर की थाप और करमा गीतों की गूंज के बीच माहौल आनंद और उल्लास से भर उठा।

करमा नृत्य की सधी लय और संतुलित ताल पर कलाकारों के थिरकते कदमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं ददरिया लोकगीतों की मीठी तान ने ग्रामीण जीवन की सरलता और आत्मीयता को दिलों तक पहुँचा दिया।

राज्योत्सव के शुभारंभ के दिन पंथी नृत्य दल ने गुरु घासीदास बाबा के उपदेशों और सत्य-अहिंसा के संदेश को भावपूर्ण अभिव्यक्ति देते हुए मंच पर एक प्रेरक दृश्य रचा। साथ ही सूफी गीतों की मधुर प्रस्तुति ने शाम के शांत माहौल को और अधिक सुरीला और आत्मस्पर्शी बना दिया।

संगीत, नृत्य और लोकरंगों के इस सुरम्य संगम ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि उन्हें प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों से भी गहराई से जोड़ा।

राज्योत्सव में आगामी दिनों में भी विभिन्न लोककला समूहों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ जारी रहेंगी। जिलेवासी इस संस्कृति उत्सव का पूरे उत्साह के साथ आनंद ले रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *