नवरात्रि में टूटी सालों की चली आ रही परंपरा

गंडई । नगर की आस्था का केंद्र प्राचीन गंगई मंदिर में कई परम्परा गयी । मंदिर के अंदर प्रवेश वर्जित कर दिया गया था । मुख्य द्वार पर लोहे का नया गेट लगाया गया । नये गेट से ही गंगई माता, शीतला माता व माँ महामाया का दर्शन करने की छूट थी ।नवरात्रि में होने वाली सुबह-शाम आरती में भक्तों की भीड़ रहती थी जिसे पूरी तरह बंद कर दिया गया । ज्योति कलश का दर्शन भी श्रद्धालुओं को संभव नही हो पाया ।घरों से भक्तों द्वारा अष्टमी के दिन चढ़ने वाला भोग भी गंगई माता को अर्पण नही हो पाया ।

मिली जानकारी के अनुसार ऐसा सैकड़ो साल बाद हुआ है । कई परम्परा कोरोना महामारी के बचाव व रोकथाम चलते शासन के आदेशानुसार बंद किया । मंदिर प्रांगण को सुबह शाम सनेटाइज कराया जाता था । स्वयं मंदिर पुजारी साकेत दुबे द्वारा भी पूजा व आरती के समय के पूर्व हाथों को सनेटाइज किया जाता था । मंदिर के गर्भगृह में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया । अष्टमी के हवन में भी सीमित संख्या रही । ज्योति कलश का विसर्जन मंदिर के सामने बने

अस्थायी कुंड में किया गया । विसर्जन में दिखने वाला भक्तों का जनसैलाब नही था । वही गंडई के पूर्व ज़मीदार लाल टाकेश्वर शाह खुशरो जी ने कहा कि एक सदी के बाद ऐसी आई जिस के कारण पूरी दुनिया मे लॉक डाउन होना पड़ा माँ गंगई हमारी कुल देवी है आज लोग माँ के दरबार मे नही आसके यहां लोगों ने शासन प्रशासन के नियमो का पूरा पालन किये और में सभी को शुभकामनाएं देता हूं वही गंडई के नयाब तहसीलदार प्रफुल गुप्ता जी ने नगरवासियो की तारीफ किये कहे में हर एक नागरिक को नवमी की शुभकामनाएं देता हूं और गंडई नगर के सभी नगरवासियो की तारीफ करता हु जो ऐसे वक्त में

शासन और प्रशासन का सहयोग किये अपने घरों में रहे मंदिरों के दरवाजे बंद रखे मस्जिद के भी दरवाज़े बंद रहे हर एक ने सहयोग किये में सभी नगर वासियो को बधाई देता हूं माँ गंगई के पुजारी साकेत दुबे ने कहा कि लोगों की मनोकामना माँ के दरबार से पूरी होती है लोगों की आस्ता माँ के दरबार से है आज माँ के दर्शन लोग नही कर सके जिसकी जो भी मनोकामना थी वो माँ के आशीर्वाद से पूरी होगी देखा जाए तो नवमी में हज़ारो की संख्या में लोग जमा होते थे मगर इस बार माहौल खामोश था वही लोगो ने अपने घरों में पूजा अर्चना किये शायद पहली बार सभी ने ऐसा माहौल देखा होगा
