सच लिखना पड़ा भारी पत्रकार पर जानलेवा हमला, थाने में FIR नहीं, क्या पशु तस्करी के खिलाफ पोस्ट बना कारण

सच लिखना पड़ा भारी पत्रकार पर जानलेवा हमला, थाने में FIR नहीं, क्या पशु तस्करी के खिलाफ पोस्ट बना कारण

कोरिया जिले के सोनहत क्षेत्र में एक बार फिर पत्रकारिता पर हमला होने का मामला सामने आया है, जहां सच उजागर करना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। लगभग दो महीने पहले चली खबर को लेकर आरोपी ने स्थानीय पत्रकार पर खुलेआम जानलेवा हमला कर दिया। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि पीड़ित की शिकायत के बावजूद थाने में FIR दर्ज नहीं की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार शैलेश चंद्र गुप्ता को मुख्य मार्ग पर रोककर अचानक हमला कर दिया गया। आरोप है कि आरोपी राजेंद्र प्रसाद साहू ने पहले उन्हें रोड पर पटक दिया, फिर लोहे के रॉड, डंडों और धारदार हथियार (चाकू) से हमला करने का प्रयास किया। हमले की यह वारदात खुलेआम सड़क पर हुई, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों का इरादा गंभीर नुकसान पहुंचाने का था, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के हस्तक्षेप से किसी तरह पत्रकार की जान बच पाई। हालांकि हमले में उन्हें सिर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना के बाद घायल पत्रकार अपने परिजनों के साथ सोनहत थाने पहुंचे, लेकिन वहां का रवैया और भी चौंकाने वाला रहा। आरोप है कि थाना प्रभारी (टीआई) मौके पर मौजूद नहीं थे और सिपाही सादे कागज पर घटना लिखते रहे। कुछ देर बाद जब टीआई थाने पहुंचे, तो हैरानी की बात यह रही कि आरोपी पक्ष का व्यक्ति भी उनके पास बैठा हुआ था।
पीड़ित का आरोप है कि FIR दर्ज करने के बजाय थाना प्रभारी ने उन्हीं को कटघरे में खड़ा कर दिया और ऊंचे स्वर में फटकार लगाते हुए पूछताछ करने लगे। बताया जाता है कि टीआई घटना को नजरअंदाज करते हुए पत्रकार द्वारा की गई खबरों पर सवाल उठाते रहे और उनसे प्रमाण मांगते रहे।
इतना ही नहीं, गंभीर चोट के बावजूद घायल पत्रकार को तत्काल अस्पताल भेजने के बजाय थाने में ही घंटों खड़ा कर सवाल करते रहे। परिजनों द्वारा बार-बार FIR दर्ज करने की मांग करने पर पुलिस का रवैया और सख्त हो गया। आरोप है कि इस दौरान महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई और उन्हें अपमानित किया गया।
आखिरकार निराश होकर परिजन घायल पत्रकार को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने सिर में गंभीर चोट को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। चिकित्सकों ने सिटी स्कैन कराने की सलाह दी है, जिससे अंदरूनी चोट की स्थिति स्पष्ट हो सके।
थाने में न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दी और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इस पर पुलिस अधीक्षक ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

क्या? पशु तस्करी के खिलाफ सोसल मिडिया पोस्ट रास नहीं आई

सोनहत क्षेत्र से लगातार सूत्रों से जानकारी प्राप्त हो रही थी की मुख्य मार्ग से रात के समय पशु तस्करी वाहने गुजरती है पत्रकार शैलेश गुप्ता ने वाट्सअप ग्रुपो में इस मुद्दे पर पोस्ट किया था थाना में जिस तरीके से क्रीमनल की तरह घंटो ट्रीट किया गया तत्कालीन घटना से हट कर भवन निर्माण की खबर के पीछे पड़े टी आई साहब और दर्द से तड़पता रहा पीड़ित पत्रकार उपचार की जल्द आवश्यकता महसूस कर रहा था पर उपचार के लिए न भेज कर घंटो पुरानी खबर क़ा प्रमाण मांगते रहे मजबूरन परिजन उपचार के लिए सोनहत हॉस्पिटल ले गए

इस घटना ने न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली पर भी गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। खुलेआम हुए इस हमले और उसके बाद थाने में हुई कथित लापरवाही से क्षेत्र के पत्रकारों और आम नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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