कैट के लिये भारत बंद का छत्तीसगढ़ सरकार ने किया समर्थन 

कमरुन निशा

जिला कोरिया/रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने कैट के भारत बंद का समर्थन किया है। GST की विसंगतियों के विरोध में कैट ने 26 फरवरी शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने जिला और ब्लॉक इकाइयों को बंद के समर्थन का निर्देश दिया है।

GST विसंगतियों के विरोध में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी कैट ने शुक्रवार 26 फरवरी को भारत बंद का आव्हान किया है। छत्तीसगढ़ में इस बंद को सफल बनाने के लिए कैट ने छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स से भी समर्थन मांगा था। लेकिन चेंबर ने बंद को समर्थन नहीं देने का निर्णय लेते हुए खुद को इस बंद से अलग रखा है। चेंबर के कार्यकारी अध्यक्ष ललीत जैसिंघ ने बताया कि कैट ने दो दिन पहले ही उन्हें चिट्ठी लिखकर समर्थन की मांग की है। लेकिन इतने कम समय में बैठक बुलाना आसान नहीं है।

कांग्रेस की तैयारी
चूंकी मामला जीएसटी और केंद्र सरकार के विरोध का है। इसलिए कांग्रेस इस मौके को सियासी तौर पर हाथ से जाने नहीं देना चाहती। कांग्रेस नेता शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बताया कि व्यापारी संगठन के द्वारा जीएसटी के खिलाफ आहूत भारत बंद का कांग्रेस ने पूरी तरह से समर्थन किया है। राजधानी रायपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने इसे लेकर गुरुवार शाम एक बड़ी घोषणा की है। 26 फरवरी शुक्रवार को सभी जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को व्यापारियों के बंद के आव्हान को समर्थन देने के निर्देश दिए गए हैं।

इन मांगों के लिए भारत बंद की कोशिश

कैट प्रमुख अमर पारवानी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में जो नए प्रावधान किये गये हैं उसके तहत अब किसी भी ट्रांसपोर्टर को ई वे बिल के तहत रोजाना 200 किमी ट्रांसपोर्टेशन करना अनिवार्य हो गया है। यदि किसी कारणवश वह ऐसा नहीं कर पाया तो उसका ई वे बिल निरस्त हो जाएगा साथ ही उस पर कर का 200 प्रतिशत पेनाल्टी भी लगाई जाएगी। फर्जी बिल, गैर-मौजूद विक्रेता, सर्कुलर ट्रेडिंग आदि के कारण कर चोरी के मामलों में, कर अधिकारी को अब बैंक खाते तथा संपत्ति को जब्त करने का अधिकार होगा । छोटी से गलती की बड़ी सजा कारोबारियों को भुगतनी होगी।

​​​​​​​यदि किसी व्यक्ति का माल विभाग द्वारा जब्त किया जाता है और यदि वो टैक्सेबल माल हैं तो अब 100 प्रतिशत के स्थान पर 200 प्रतिशत जुर्माना देना होगा, अगर आप किसी भी कारण से रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं तो डिपार्टमेंट सेक्शन 73 के अंदर आप को नोटिस दे सकता है , यदि आपने गलती से कोई गलत इनपुट क्रेडिट ले लिया है तो आपका बैंक खाता सीज हो जाएगा, अधिकारी अपने खुद के विवेक के आधार पर किसी का भी सर्वे या ऑडिट कर सकते हैं। 4 साल हो गए हैं पर अभी तक अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित नहीं हुआ है जिसकी वजह से हर छोटे केस के लिए व्यापारी को हाई कोर्ट जाना पड़ रहा है। जीएसटी कॉउन्सिल अपने नियमों में अब तक चार साल में 950 के करीब संशोधन कर चुकी है लेकिन बेहद अफसोस है की व्यापारियों को अपनी रिटर्न में संशोधन एक बार भी करने का अधिकार नहीं है।

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