शेषाचलम के लाल चंदन से मिलेगी कोरिया वन मंडल को अलग पहचान जल्द ही रोपे जाएंगे चार सौ तैयार पौधे, लाल चंदन के प्लांटेशन पर भी कार्य कर रहा कोरिया वन मंडल सहायक वन संरक्षक अखिलेश मिश्रा।

शेषाचलम के लाल चंदन से मिलेगी कोरिया वन मंडल को अलग पहचान

जल्द ही रोपे जाएंगे चार सौ तैयार पौधे, लाल चंदन के प्लांटेशन पर भी कार्य कर रहा कोरिया वन मंडल

कोरिया बैकुंठपुर – जैसा की सभी जानते हैं की लाल चंदन जो सिर्फ आंध्र की शेषाचलम पहाड़ियों में पाए जाते हैं लाल चंदन (रेड सैंडल) के पेड़ को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। शैव और शाक्त मत को मानने वाले पूजा में इस लकड़ी का प्रयोग करते हैं। लाल चंदन में सफेद चंदन की तरह कोई सुगंध नहीं होती है। यह काफी गुणकारी होता है। औषधीय गुणों के साथ ही इसका प्रयोग सुंदरता को निखारने के लिए भी किया जाता है।कॉस्मेटिक्स सौंदर्य उत्पादकों के साथ साथ लाल चंदन की लकड़ियों से दूसरे देशों के पारंपरिक बाध्य यंत्र भी बनाए जाते हैं।तमिलनाडु की सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के चार जिलों- नेल्लोर, कुरनूल, चित्तूर, कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही लाल चंदन के पेड़ उगते हैं। इस पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से लेकर 11 मीटर तक की होती है। इसका घनत्व काफी अधिक होता है और पानी में यह डूब जाती है। यही लाल चंदन की लकड़ियों की पहचान है।

कैसे की जा रही है लाल चंदन के प्लांटेशन की तैयारी,,,

कोरिया वन मंडल के सहायक वन संरक्षक अखिलेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया की कोरिया वन मंडल अंतर्गत आनंदपुर फारेस्ट नर्सरी में प्रयोग के तौर पर लाल चंदन के बीजों को उगाया गया था।जिसके बाद अभी वर्तमान में उक्त बीजों से करीब चार सौ पौधे तैयार किए जा चुके हैं।जिनको एक विशेष संरक्षित वन क्षेत्र में बतौर प्लांटेशन रोपा जाएगा। श्री मिश्रा ने बताया की इस लाल चंदन के लिए कुछ सावधानियां भी रखी जाती है जैसे हमेशा नमी और छांव दार वनभूमि में इसे रोपित नही किया जाता है।लाल चंदन के लिए मिट्टी कैसी है ये भी मायने नहीं रखता।लाल चंदन का पौधा शुरुआती दिनों में लातेदार टहनियों में विकसित होता है इसलिए सहारे की आवश्यकता पड़ती है ताकि यह परिपक्व होते तक सीधा रहे।लाल चंदन पांच डिग्री से लेकर पैतालीस डिग्री तक की गर्मी में भी आसानी से हरा भरा और जीवित रह सकता है।उन्होंने बताया की लाल चंदन पर रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया जाता।वहीं जैविक खाद वर्मी कंपोस्ट इसके शुरुआती अंकुरण प्रक्रिया से परिपक्व होते तक बहुत लाभकारी साबित हुआ है।जैसा की हमने लाल चंदन के अंकुरण प्रक्रिया में आजमाया और परिणाम पाया।आगे और भी जानकारी देते हुए कहा की विभाग द्वारा लाल चंदन के बीजों को महाराष्ट्र से मंगवाया गया था।जिसके बाद हम शत प्रतिशत उन बीजों से पौधा तैयार करने में सफल हुए हैं।और प्रयास जोरों पर है की सफेद चंदन और लाल चंदन के बड़े बड़े प्लांटेसन बहुत जल्द तैयार कर लिए जाएं। जिससे कोरिया वन मंडल को एक अलग पहचान लाल चंदन से मिल सके।साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी कई ऐसे प्रजाति के पौधों की उन्नत किस्म की बीज से अंकुरण प्रक्रिया द्वारा हल्दू,बीजा,जैसे लुप्त होती प्रजातियों के पौधों को भी बड़े पैमाने पर प्लांटेशनों में रोपा जा चुका है और ज्यादा से ज्यादा इन प्रजाति के पौधों को विकसित किया जा सके पुरजोर अभियान जारी है।

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