पीसी-पीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का पालन सभी नर्सिंग होम एवं सोनोग्राफी सेंटर सुनिश्चित करें – कलेक्टर’

kamrun nisha

पीसी-पीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का पालन सभी नर्सिंग होम एवं सोनोग्राफी सेंटर सुनिश्चित करें – कलेक्टर’
’जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक संपन्न’

कोरिया 14 नवम्बर 2022/ कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक सह कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर लंगेह ने हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेन्टरों के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी सोनोग्राफीकर्ता चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट का पालन सभी नर्सिंग होम एवं सोनोग्राफी सेंटर सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम जन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना हमारी प्राथमिकता है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण अधिनियम है, इसके अंतर्गत नियमों का उल्लंघन ना हो। बैठक सह कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आरएस सेंगर, डीपीएम एनएचएम डॉ प्रिंस जायसवाल, लीगल एक्सपर्ट श्री ध्रुव कश्यप सहित जिला सलाहकार समिति के सदस्य एवं शासकीय व निजी चिकित्सालयों के सोनोग्राफीकर्ता चिकित्सक उपस्थित रहे।
इस दौरान कलेक्टर लंगेह ने जिले में सोनोग्राफी केन्द्रों एवं पंजीकृत संस्थाओं की जानकारी ली। डीपीएम ने बताया कि कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कुल 17 पंजीकृत संस्था है। कलेक्टर ने नवीन पंजीयन, वैधता, फार्म-एफ में जानकारी संधारण की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फॉर्म एफ का ऑनलाइन एवम ऑफलाइन दोनों स्थितियों में अद्यतन संधारण सुनिश्चित करें। कार्यशाला में पीसी पीएनडीटी एक्ट के तहत प्रावधानों एवं नवीन दिशानिर्देशों की विस्तार से जानकारी दी गई।
’पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट, 1994 – पूर्व-गर्भाधान और पूर्व-प्रसव निदान तकनीक अधिनियम क्या है -’
गर्भधारण से पहले या बाद में, लिंग चयन के निषेध के लिए और आनुवंशिक असामान्यताओं या मेटाबोली संबंधी विकारों या क्रोमोसोमल असामान्यताओं या कुछ जन्मजात विकृतियों का पता लगाने के प्रयोजनों के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के विनियमन के लिए एक अधिनियम है। लिंग अवधारण के लिए ऐसी तकनीकों के, जिनके कारण स्त्री लिंगी भ्रूण वध हो सकता है, दुरुपयोग के निवारण तथा उससे जुड़े या प्रासंगिक मामलों के लिए यह अधिनियम बनाया गया है।

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