फातिहा दरूद के पश्चात विसर्जन के लिए निकली ताजिया बैकुंठपुर मुहर्रम के महीने में 10वें दिन इस्लाम की रक्षा के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने जीवन की कुर्बानी दे दी

kamrun nisha.


जिला कोरिया बैकुंठपुर मुख्यालय के अंतर्गत हुसैनी अखाड़ा बैकुंठपुर एवं जूनापारा में ताजिया बनाए जाते हैं और मुहर्रम तकरीर हसन हुसैन का वाक्य बताए जाता है
मुस्लिम धर्म के अनुसार, मुहर्रम का इतिहास 662 ईस्वी पूर्व का है। मुहर्रम के महीने में 10वें दिन इस्लाम की रक्षा के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने जीवन की कुर्बानी दे दी थी। इसी वजह से मुहर्रम महीने के 10वें दिन मुहर्रम मनाया जाता है। यहूदियों ने बहुत ही जुल्मढाई लेकिन इस्लाम धर्म के लिए सय्यद घराने वाले अपनी जान की कुर्बानी दे दी हंसते-हंसते जिससे सभी लोगों में भाईचारा महब्बत और इंसानियत का पैगाम दिया गया।

यजीद बोला बड़ी फौज मेरे साथ है, हुसैन बोले नतीजा अल्लाह के हाथ है, यजीद बोला उधर मौत इधर खजाना है, हुसैन बोले मुझे नाना को मुंह दिखाना है, यजीद बोला मैं हा हाकीम हूं जब़ कर सकता हूं, हुसैन बोले सय्यद हूं सब्र कर सकता हूं , यह यजीद बोला पानी पर मेरा कब्जा है, हुसैन बोले कौसर पर मेरा कब्जा है, यजीद बोला कफन तक न उड़ाया जायेगा , हुसैन बोले जन्नत से जोड़ा आयेगा। घड़ी चौक बैकुंठपुर में फतिया दारूदो की गूंजी आवाज दूसरी और लंगरलुटाया गया शरबत की व्यवस्था की गई बस स्टैंड के माने जाने एजेंट आशिक गुड्डू के द्वारा एवं टीम के दारा स्वयं रहे तैनात आशिकगुड्डू भैया।

बैकुंठपुर के थाना प्रभारी एवं उनकी पुलिस प्रशासन शांतिव्यवस्था को बनाए रखें तैनात रहे चारों तरफ से कि किसी भी प्रकार कि परेशानी ना हो किसी को नन्नहू आशिक गुड्डू बस स्टैंड मोइन खान अब्दुल कलाम खान संजू जायसवाल बाबा खान शाहिद अशरफी एवं मस्जिदों के मेंबर बबलू उस्मान सभी रहे उपस्थित मोहर्रम में दोनों अखाड़ेके युवा लड़के शानदार प्रदर्शन खेल का उनके द्वारा घड़ी चौक में प्रस्तुत भी की गई शांतिपूर्वक भाईचारे क मिसलपेश की गई हम सब एक हैं मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना वतन है हमारा और ताजियों को कर्बला के सुपुत्रकिया गया ।

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