नेत्र जांच महाअभियान बना जन-जागरूकता की मिसाल, 2416 चालकों की हुई जांच, 1000 को मिला नि:शुल्क दवा व चश्मा

kamrun nisha.

नेत्र जांच महाअभियान बना जन-जागरूकता की मिसाल, 2416 चालकों की हुई जांच, 1000 को मिला नि:शुल्क दवा व चश्मा

कोरिया (छत्तीसगढ़), 22 मई 2025

कोरिया जिले में सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अभिनव पहल के रूप में जिला परिवहन विभाग और आर्थो वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नि:शुल्क नेत्र जांच महाअभियान का सफल समापन हो गया। 1 मई से 22 मई तक चले इस अभियान में कुल 14 शिविरों के माध्यम से जिलेभर में 2416 वाहन चालकों की आंखों की जांच की गई, जिसमें 1000 से ज्यादा जरूरतमंद चालकों को नि:शुल्क चश्मों व दावा वितरण किया गया। जिसमे 1 मई खरवत चौक, 2 मई बरबसपुर टोल, 3 मई पटना हाइवे, 5 मई दुबछोला चौक, 6 मई डुमरिया नाका, 7 मई सोनहत बाजार, 8 मई ग्राम बुढ़ार, 9 मई बचरापोंडी, 10 मई सुरमी चौक, 12 मई चरचा थाना, 13 मई बंजारीडांड, 15 मई बैकुण्ठपुर बस स्टैंड, 19 मई टेंगनी नाका व अंतिम शिविर 22 मई को कटगोड़ी पहाड़पारा में आयोजित हुआ।

इस जनहितैषी पहल का उद्देश्य चालकों की दृष्टि संबंधी समस्याओं का समय रहते समाधान कर सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना था। अंतिम शिविर 22 मई को पहाड़पारा चौक कटगोड़ी में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में चालकों ने नेत्र जांच सेवाओं का लाभ उठाया। नेत्र विशेषज्ञ मोहसीन रज़ा और उनकी टीम द्वारा न केवल गहन जांच की गई, बल्कि आवश्यकतानुसार दवाएं और चश्मे भी नि:शुल्क प्रदान किए गए।

जिला परिवहन अधिकारी श्री अनिल भगत ने अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह अभियान केवल नेत्र जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और सामूहिक स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक व्यापक कदम है। हम आने वाले समय में ऐसे शिविरों में ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी जांचें भी शामिल करेंगे।”

आर्थो वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष शकील अहमद और उनकी समर्पित टीम—मनोज कुमार मंडल, राहुल सिंह, तरुण प्रताप सिंह, नंदनी, आकांक्षा, माही पंकज, सरिता कुर्रे, स्वीटी सिंह और शबाना—ने शिविरों के संचालन में उल्लेखनीय योगदान दिया वही पुलिस प्रशासन व ग्रामपंचायतो की सक्रिय भूमिका ने भी आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अभियान की सराहना करते हुए स्थानीय चालक भरत कुमार सिंह ने कहा, “मेरी आंखों में समस्या थी, लेकिन समय और पैसे की कमी के कारण जांच नहीं करवा पा रहा था। इस शिविर ने मुझे राहत दी और अब मैं आत्मविश्वास से वाहन चला सकता हूं।”

जिला परिवहन अधिकारी ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे हर छह माह में आंखों की जांच अवश्य कराएं, साथ ही हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रयोग को अनिवार्य रूप से अपनाएं। यह न केवल उनकी नही बल्कि आम नागरिकों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

कोरिया जिले की यह पहल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देशभर के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गयी है। यह साबित करता है कि सुरक्षित सड़कें केवल नियमों से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही संभव हैं।

आइए, हम सब मिलकर इस प्रयास को और आगे बढ़ाएं—सड़क सुरक्षा और स्वस्थ जीवन की ओर एक और कदम।

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