मधुमक्खी पालन विषय पर 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न कृषि विज्ञान केंद्र, कोरिया
kamrun nisha

जिला कोरिया बैकुंठपुर,,,मधुमक्खी पालन विषय पर 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
कृषि विज्ञान केंद्र, कोरिया (छत्तीसगढ़) द्वारा National Beekeeping and Honey Mission (राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन) के अंतर्गत मधुमक्खी पालन विषय पर 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण में कोरिया जिले के 25 से 35 कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण में सम्मिलित सभी प्रतिभागी कोरिया जिले के विभिन्न क्षेत्रों से थे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों, शहद उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण तथा विपणन की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
इस अवसर पर प्रशिक्षण प्रभारी, डॉ. विजय कुमार कृषि वैज्ञानिक ने अपने उद्बोधन में कहा कि
“मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का एक सशक्त एवं टिकाऊ स्रोत है। यह न केवल शहद एवं अन्य मूल्यवान उत्पाद प्रदान करता है, बल्कि फसलों के परागण के माध्यम से उत्पादन में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीमित संसाधनों में भी इसे आसानी से अपनाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि मधुमक्खी पालन को कृषि के साथ एकीकृत करने से किसानों की आय में वृद्धि संभव है।
इसी क्रम में प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख इंजीनियर कमलेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
“तिलहन फसलों जैसे सरसों, सूरजमुखी एवं तिल में मधुमक्खी पालन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। मधुमक्खियों द्वारा प्रभावी परागण से न केवल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि दानों की गुणवत्ता एवं तेल की मात्रा में भी सुधार आता है। किसान यदि फसल के साथ मधुमक्खी पालन को जोड़ते हैं, तो उन्हें दोहरा लाभ—फसल उत्पादन एवं शहद उत्पादन—प्राप्त होता है।”
कार्यक्रम में डॉ. के. सी. राजहंस, डॉ. शिखा सिंह, श्री फूलचंद कंवर एवं पंकज केशरवानी की विशेष उपस्थिति रही।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे अपने कृषि कार्यों में अपनाने की सहमति व्यक्त की।
अंत में कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

