रोका-छेका” परम्परा अनुरूप खुले में विचरण कर रहे पशुओं के नियंत्रण व गौठानों में व्यवस्थापन के लिये गौठान प्रबंधन समितियों को शासन द्वारा दी गई अनुदान राशि

कमरून निशा
40,000 रूपये प्रति गौठान के मान से अनुदान राशि की प्रथम किस्त जारी
कोरिया 19 जून 2020/ प्रदेश में “रोका-छेका” परम्परा के अनुरूप खुले में विचरण कर रहे पशुओं के नियंत्रण व गौठानों में व्यवस्थापन के लिये मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा प्रदत्त निर्देशानुसार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के गौठानों की गौठान प्रबंधन समितियों को शासन के वित्त विभाग द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 40,000 रूपये की अनुदान राशि प्रति गौठान के मान से जारी की गई है।
प्रदत्त अनुदान राशि को गौठान प्रबंधन समिति प्राथमिकता से विभिन्न प्रकार के पूंजीगत, परिचालन एवं रखरखाव कार्यों हेतु नियमानुसार व्यय कर सकेगी। “रोका-छेका” परम्परा अनुसार पशुओं की खुले में चराई के नियंत्रण हेतु गौठान प्रबंधन समिति को प्रदायित राशि के उपयोग के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किये गये हैं। विभिन्न कार्य एवं इन कार्यों हेतु अधिकतम व्यय की सीमा शासन द्वारा निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार गौठान प्रबंधन समिति आवश्यकता का आंकलन करते हुये कार्य संपादन एवं उपलब्ध राशि का नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित कर सकेगी।
उल्लेखनीय है कि फसल बुआई कार्य के पूर्व खुले में चराई कर रहे पशुओं के नियंत्रण हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में “रोका-छेका” परम्परा प्रचलित है जिसमें फसल बुआई को बढ़ावा देने तथा पशुओं के चरने से फसल को होने वाले हानि से बचाने के लिये पशुपालक तथा ग्रामवासियों द्वारा पशु को बांधकर रखने अथवा पहटिया की व्यवस्था इत्यादि कार्य किया जाता है। उक्त प्रयास से न सिर्फ कृषक शीघ्र बुआई कार्य संपादित कर पाएंगे अपितु द्वितीय एवं तृतीय फसल लेने हेतु भी प्रेरित होंगे। शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी योजना अंतर्गत प्रदेश भर में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में गौठानों का निर्माण किया गया है। “रोका-छेका” परम्परा के माध्यम से राज्य सरकार का प्रयास है कि समाज के लोगों विशेषकर किसानों एवं पशुपालकों का सहयोग लेते हुये मवेशियों को सुबह से शाम तक गौठान में रोक कर रखा जावे, जिससे कि गांव “खुले में चराई मुक्त” हो सके तथा शहरी क्षेत्र में खुले में विचरण कर रहे मवेशियों के कारण हो रही दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
