गौठान समितियों के लिए गौठान बन रहे आर्थिक उन्नति के माध्यम, अब तक 10 टन वर्मी कंपोस्ट की आपूर्ति कर चुकी हैं समिति की महिलाएं
कमरून निशा
कोरिया 22 जून 2020/ कोरिया जिले में गौठान समितियों से जुडी महिलाओं के स्वसहायता समूह अब गौठानों से आर्थिक उन्नति के रास्ते पर बढ़ रहे हैं। ग्राम गौठान समितियों से जुड़ी महिलाओं के समूह विभिन्न शासकीय विभागों को मांग के आधार पर वर्मी कंपोस्ट के रूप में केंचुआ खाद बेचकर कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रही हैं। प्रथम चरण में बने 10 आदर्श गौठानों में से 6 गौठानों से महिलाओं ने 100 क्विंटल से ज्यादा वर्मी खाद बनाकर वन विभाग मनेन्द्रगढ़ को आपूर्ति कर ली है। यह प्रक्रिया अब निरंतर गतिमान रहने के साथ ही सभी गौठानों में समितियों की अतिरिक्त आय का जरिया भी बन गया है।
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी तूलिका प्रजापति ने बताया कि विकासखंड बैकुण्ठपुर, खड़गंवा, सोनहत और मनेन्द्रगढ़ के गौठान समितियों से जुड़ी महिलाओं ने वर्मी कंपोस्ट तैयार करना प्रारंभ कर दिया है। जिले में प्रथम चरण के आदर्श गौठानों में यह काम प्रमुखता से कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन में 6 महिला समूहों की 54 महिलांए काम कर रही हैं जिसमें से बैकुण्ठपुर के ग्राम पंचायत सोरगा में निर्मित गौठान से जुड़े मां कुदरगढ़ी समूह के द्वारा 02 क्विंटल तथा ग्राम पंचायत नरकेली के गौठान से जुड़े गोयल महिला समूह के द्वारा 02 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार कर वन विभाग मनेन्द्रगढ़ को बेचा गया है। इसके साथ ही सोनहत के ग्राम पंचायत पोड़ी स्थित गौठान से जुड़े साक्षर महिला समूह द्वारा 20 क्विंटल तथा घुघरा के गौठान से जुड़े मां दुर्गा समूह की महिलाओं ने 26 क्विंटल, पुसला के गौठान से जुड़े शारदा समूह की महिलाओं ने 23 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट वन विभाग को आपूर्ति की है। मनेन्द्रगढ़ के आदर्श गौठान रोझी से जुड़े जय संतोषी मां स्व सहायता समूह की महिलाओं ने 30 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर वनमंडल मनेन्द्रगढ़ को आपूर्ति की है। प्रथम चरण में ही इन 6 समूह की महिलाओं के द्वारा 87 हजार रूपए का व्यवसाय कर लिया गया है। अब तक सभी जगह मवेशियों के मुक्त रूप से घूमने के कारण यह कार्य धीमी गति से हो रहा था परंतु रोका-छेका व्यवस्था के अस्तित्व में आने से अब मवेशियों के लिए उपयुक्त व्यवस्था होने पर उत्पादन को गति मिलने की संभावना है। सभी गौठानों में वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए इनसे जुड़े समूह की महिलाओं का कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के माध्यम से प्रशिक्षण कराकर महिलाओं को केंचुआ खाद बनाने में प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही अब जबकि वर्मी कंपोस्ट से जुड़े समूहों को आय प्राप्त होने लगी है तो इससे आने वाले समय में यह एक व्यवसाय के रूप में सारे गौठानों में और बेहतर ढंग से क्रियान्वित होने लगेगा।

