कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा मशरूम उत्पादन बना जीवकोपार्जन की साधन कोरिया जिला के कृषकों एवं महिला स्व सहायता समूहों ने मौसम आधारित प्राकृतिक रूप से निकले फूटू, खुखड़ी पर निर्भर थे
कमरून निशा

जिला कोरिया मैं मशरूम उत्पादन बना जीवकोपार्जन की साधन
कोरिया जिला के कृषकों एवं महिला स्व सहायता समूहों ने मौसम आधारित प्राकृतिक रूप से निकले फूटू, खुखड़ी पर निर्भर थे जिससे बहुत कम समय के लिए जगलों से खुखड़ी, फूटू प्राप्त कर बाजारों में बेच कर आय अर्जित करते थे। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के द्वारा कोरिया जिला के कृषकों के आमदनी को बढ़ाने के लिए कृत्रिम रूप से नियंत्रित कक्षों में विभिन्न मषरूम प्रजातियों को उगाकर पषुपालन एवं कृषि कार्य के अलावा बहुत कम समय में कम जगहों में मषरूम उत्पादन कर अधिक आय अर्जित करा रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के द्वारा सभी विकास-खण्ड़ के कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को मषरूम प्रजातियों के उत्पादन तकनीक, मषरूम बीज बनाने की विधि एवं मषरूम में होने वाले रोग एवं प्रबंधन के बारे में प्रषिक्षण एवं मार्गदर्षन कर विभिन्न प्रजातियों के मषरूम जैसे- आॅयस्टर, बटन एवं पैरा मषरूम का प्रचार प्रसार कर कृषकों के प्रक्षेत्रों में प्रदर्षन कर कृषकों को मषरूम के प्रति जागरूक एवं लांभावित किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में 30 से 40 कृषकों के द्वारा मषरूम उत्पादन किया जा रहा था। वर्तमान में 200 से अधिक कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा मषरूम उत्पादन किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया में स्थापित मषरूम प्रयोगषाला से उच्च गुणवत्ता की मषरूम बीज तैयार कर मौसम के अनुसार कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को प्रति माह 50 से 60 किलो ग्राम बीज प्रदाय किया जा रहा है। कृषकों को बाजारों से जोड़ने के लिए मषरूम के विभिन्न व्यंजन तैयार कर एवं मूल्य संर्वधन कर अधिक मुनाफा कराया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के द्वारा कृषकों के द्वारा उत्पादित बचे हुए कच्चा मषरूम क्रय किया जा रहा है अभी तक कोरिया जिला के कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों से 750-800 किलो ग्राम कच्चा मषरूम क्रय किया जा चुका है। 150-200 किलोग्राम सूखा मषरूम, मषरूम पाउडर, मषरूम पापड़, मषरूम अचार एवं आदि मषरूम से बने व्यंजन को क्रय किया गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के प्रमुख वैज्ञानिक एवं वैज्ञानिकों ने बताया कि आॅयस्टर मषरूम उत्पादन में प्रति बैंग 35-40 रूपये लागत आती है जिससे शुद्ध लाभ प्रति बैग 60-70 रूपये होती है आॅयस्टर मषरूम की खेती वर्ष भर कर सकते हैं। ठण्डी के दिनों में बटन मषरूम प्रति एक क्विंटल कम्पोस्ट से 12 से 14 किलोग्राम उत्पादन कर रहे है। बटन मषरूम बजारों में अधिक मांग होने के कारण 200-250 रूपये की दर से बेचा जा रहा है। गर्मी के दिनांे में पैरा मषरूम प्रति बेड से 5-6 किलोग्राम उत्पादन कर अधिक आमदनी अर्जित कर रहे है पैरा मषरूम खाने में अधिक स्वादिष्ट होता है। इस तरह से कोरिया जिला के कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया के द्वारा वर्ष भर मौसम आधारित मषरूम उत्पादन कराकर लाभांवित कर रहे है। कोरिया जिला के कृषकों एवं महिला स्व-सहायता समूहों ने मषरूम की खेती को जीवोत्पार्जन की जरिया बना रहे है क्योंकि मषरूम खाने में स्वादिष्ट एवं पोष्टिक सब्जी के रूप में तेजी से विकास हो रहा है, बाजार के अनुरूप मांग को देखते हुए मषरूम की खेती पर ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहरी क्षेत्रों में कृषकों ने अधिक जोर दे रहे है। बैकुण्ठपुर विकास-खण्ड़ में कटकोना, रामपुर नगर, बैकुण्ठपुर, मझगंवा, नरकेली, भण्डारपारा, चरचा, बंजारीड़ंाड, सारा, सोरगा आदि। विकास-खण्ड़ सोनहत, धुमाड़ाड, कर्री, सोनहत, कटघोडी, रजोली आदि। विकास-खण्ड़ मनेन्द्रगढ़, लोहारी, उजियारपुर, बेलबहरा, ताराबहरा, चिरमिरी, सरभोका, बंजी आदि। विकास-खण्ड़ खडगंवा सैदा, सकरिया, खडगंवा, बचरापोड़ी, चिरमी आदि। विकास-खण्ड भरतपुर हरचोका, बहराषि, देवगढ़, माडी सरई, जनकपुर आदि। इस तरह से वृहत् स्तर पर मषरूम उत्पादन कर रहे कृषकों का नाम अन्नू राजवाडे़, अरविन्द्र, राजकुमारी, मूलचंद, प्रवीण, मधु, रूपाली, बंुदकुंवर, आषुतोष, मंतोष, तारावती, सुमन, लखमनिया, षिला एक्का, जैनुद्दीन, जयंती, कमलेष, मेहीलाल आदि कृषक मषरूम उत्पादन को आजीविका का साधन बना कर प्रति माह 8-10 हजार रूपये कमा कर घर के खर्च चला रहे है।

