कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के तकनीकी मार्गदर्षन में कृत्रिम रुप से कोरिया जिला में बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक मशरुम खेती कर किसान वर्ष भर अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे है।
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कोरिया जिले के कृषकों को मशरुम की खेती ने दी नई दिशा
कोरिया 26 जून 2021/ कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के तकनीकी मार्गदर्षन में कृत्रिम रुप से कोरिया जिला में बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक मशरुम खेती कर किसान वर्ष भर अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे है।
जिला प्रशासन कोरिया् एवं इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय के मार्गदर्षन में कृषि विज्ञान केन्द्र में मशरुम की खेती को बढ़ावा देने एवं रोजगार से जोड़ने के लिए 50 से अधिक कृषकों को प्रषिक्षण प्रदाय किया गया। वर्ष 2020-21 कोरोना काल में कोरिया जिला के कृषकों को मौसम के अनुसार अलग-अलग मषरुम प्रजाति के मषरुम उत्पादन प्रयोगषाला से उच्च गुणवत्ता वाले मशरुम बीज तैयार कर प्रदाय किया गया जिसमें मुख्य रुप से आॅस्टर मशरुम बीज की 615 किलोग्राम 71 कृषक, बटन मषरुम बीज 80 किलेाग्राम 6 कृषक, दुधिया मषरुम के 20 किलोग्राम 04 कृषक एवं पैरा मषरुम के 30 किलोग्राम 05 कृषकों को दिया गया जिससे कोरिया जिला में मषरुम की उत्पादन में काफी बढोत्तरी हुई।
विगत वर्ष कोरिया जिला में बटन मशरुम के कुल उत्पादन लगभग 670 किलोग्राम हुआ था जिससे कृषकों को लगभग 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुई । वहीं आॅस्टर मषरुम की उत्पादन लगभग 5 हजार 890 किलोग्राम हुआ जिससे कृषकों को लगभग 3 लाख 50 हजार की आमदनी हुई।
आॅयस्टर मषरुम की खेती कोरिया जिला में काफी मात्रा में की जाती है। आॅस्टर कच्चा मशरुम को कृषकों द्वारा लोकल बाजार, दुकानों एवं बचे हुए कच्चा मशरुम, सुखा मशरुम को कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा गठित किसान उत्पादक संगठन को बेचा जिसमें आॅयस्टर मशरुम को मूल्य संवर्द्धन एवं प्रसंस्करण कर आॅयस्टर सुखा मशरुम लगभग 80 हजार रुपये, मषरुम बड़ी 20 हजार हजार रुपये एवं मशरुम पापड़ 15 हजार रुपये कृषकांे द्वारा विगत वर्ष में बेचा गया। किसान उत्पादक संगठन द्वारा मशरुम उत्पाद को ट्राईफेड, हस्तषिल्पबोर्ड, खादी ग्रामोद्योग एवं फिल्पकार्ड में बेचा गया। जिससे कोरिया जिला के कृषकों को मार्केटिंग का प्लेटफार्म मिलने से काफी आमदनी प्राप्त हो रही है।
इसी तरह दुधिया मशरुम का कुल उत्पादन लगभग 50 किलोग्राम रहा और पैरा मशरुम का अनुमानित उत्पादन 120 किलोग्राम तक रहा विगत वर्षों में कोरिया जिला के 10 कृषकों को मषरुम बीज बनाने की विधि एवं उत्पादन तकनीक पर कोरोना काल में 5-5 के समूह बनाकर 14 दिवस का प्रषिक्षण दिया गया। 3 महिला समूह को मशरुम की मूल्य संवर्द्धन एवं प्रसंस्करण पर प्रषिक्षण दिया गया मशरुम की खेती से कृषकों को नई दिषा एवं रोजगार मिला।
के.वी.के. कोरिया के कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार अनंत ने बताया कि कोरोनाकाल में कृषकों का रुझान मशरुम की खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है। कोरिया जिला के मशरुम उत्पादक कृषकों एवं किसान उत्पादक संगठन को बाजारों से जोड़ा गया है। विगत वर्षों से कोरिया जिला में मशरुम की खेती को बढ़ावा देने एवं मशरुम की खेेती का प्रचार-प्रसार करने के लिए तथा कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक रुप से की जाने वाली मषरुम की खेती जैसे-बटन मशरुम, पैरा मशरुम, आॅयस्टर मषरुम एवं दुधिया मशरुम को मौसम के अनुसार कृषकों के प्रक्षेत्र में प्रयोगिक तौर पर अलग-अलग मशरुम की खेती कराकर व्यावसायिक मशरुम की खेती को फैलाया गया है साथ ही साथ कृषकों को मशरुम बीज बनाने एवं उत्पादन तकनीक तथा मशरुम की मूल्य संवर्द्धन एवं प्रसंस्करण पर प्रषिक्षण दिया गया जिससे मशरुम उत्पादक कृषक मशरुम से विभिन्न उत्पाद तैयार कर अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. रंजीत सिंह राजपूत ने बताया कि के.वी.के. में स्थापित मशरुम प्रयोगषाला से उच्च गुणवत्ता की मशरुम बीज तैयार कर विगत वर्षों में कोरिया जिला के 80 से 90 कृषकों 745 किलोग्राम विभिन्न प्रजाति के मशरुम का बीज प्रदाय किया गया है। जिससे कृषकों को मशरुम की खेती से 6 से 7 लाख की आमदनी प्राप्त हुई है। आगे मशरुम की मूल्य संवर्द्धन एवं प्रसंस्करण कर मशरुम बड़ी, मशरुम पापड़ एवं मशरुम पावडर बनाकर किसान उत्पादक संगठन के द्वारा ट्राईफेड, हस्तषिल्प बोर्ड एवं खादी इंडिया को बेचने की तैयारी है।
