कोरिया गड़ के बारे में पूरे देश को दिखाने का अथक प्रयास आदिवासी समाज में जागा है, कोरिया जिले कि अस्तित्व क्या है,,,? आख़िर कोरिया गड़ कैसे पड़ा,,, क्यों पड़ा,,,?
हेडिंग – कोड़या के आदिवासी समाज अपने मूल धरोहर को देखने पहुंचे, घनाघोर जंगल, प्राकृतिक चट्टानों पथरीली उद्गम स्थान पर चड़ कर पूजा किए।
आज दिनांक 30/8/2021 को कोल राजा और गोंड ज़मीनदारों की एक संयुक्त सैन्य बल ने बलेंद शासको को कोड़या से खदेर दिया था। कोल कोंच , कोल के रूप में जाने जाते थे और ग्यारह पीढ़ियों तक शासन किया है, कहा जाता है। एक राय यह है वहाँ कोरियागढ़ के शीर्ष पर एक पठार है और वहाँ कुछ खंडहर देख सकते हैं।
आपको बता दें कि यहां का शीला को ऐतिहासिक नुमा राजा बैकुंठपुर और खड़गवां ब्लॉक के आदिवासी समाज के प्रमुख जनों के साथ हमारी प्राचीन सभ्यता कोरयागड़ के इतिहास को जानने के लिए आज हम सभी काफी मस्ककत के बाद लगातार 4 घंटे तय करते हुए, 3 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद आना जाना करके पूरे 8 घंटे का सफर तय किया गया, हम कोर्यागड़ पहुंचे, वहां हमने देवी,देवताओं का दर्शन प्राप्त किया,पूजा अर्चना की गई, राजाओं के समय का तालाब , कुआं,मंदिर ,गुफा और शिलालेख भी देखे साथियों कोरिया जिले के विभाजन के पश्चात खड़गवां ब्लॉक को कोरिया में यथावत रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा हैं। कोरेया गढ़ जिसे पूर्वजों ने अपनी हाथो से कोड़ कोड़ कर बनाया गया,अपने देवी देवताओं को वहां पर स्थापित किए,। कोरिया एवं कोरेया गढ़ के इतिहास पर आज एक स्टोरी बनाई गई है। जिसका बहुत जल्द पूरे भारत देश में इस स्टोरी को जाना जाएगासतनरायण के द्वारा कोरिया जिला के जंगल में विराजमान देवी देवताओं की प्रतिमा विराजमान की हिस्ट्री बताते हुए कोरिया जिला के जंगल सौंदर्य के बारे में एवं आदिवासी समाज के बारे में विस्तार रूप से उनके परंपराएं उनकी विशेषता का बयान नहीं किया जा सकता है अपार है एक बार फिर कोरिया जिला के आदिवासी अंचल के सदस्य गणों ने फिर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चेतावनी दी है संभल जाओ प्रदेश के मुखिया वक्त नहीं लगेगा आपको कुर्सी से नीचे बैठाने में कोरिया जिला के संस्कृत के साथ छेड़छाड़ करना बंद करिए जन जन का नारा है कोरिया जिला हमारा जय जोहार जय कोरिया