मोहर्रम के दसवीं तारीख को इमाम हुसैन की शहादत को सलाम घड़ी चौक बैकुंठपुर में फातीया एवं दरूदओ सलाम पेश की गई नुमाइसी अंग्रेज डंडा तलवार खेलों का प्रदर्शन किया गया
kamrun nisha

जिला कोरिया बैकुंठपुर मे इमाम हुसैन की शहादत को सलाम हज़रत इमाम ए हुसैन के रोजे के दीदार करो और दुसरो को भी ये बताओ ताके सब रोजे के दीदार कर सखे अल्लाह इमाम ए हुसैन के सदके हम सबकी दीली जाएज़ तमन्ना दुआ ऐ पूरी करे🌹🌹🌹
इमाम हुसैन की शहादत को सलाम

इमाम हुसैन की शहादत को सलाम उनके लिए सच्चाई और न्याय के मूल्यों से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं था, समानता और निष्पक्षता पर उनका जोर शक्ति देता है

हर साल की भांति इस साल भी मुस्लिम समाज के लोगों ने मुहर्रम के मौके पर शहीदे शहादा इमाम हुसैन की शान में नुमाइसी अंग्रेज डंडा तलवार खेलों का प्रदर्शन किया गया है घड़ी चौक बैकुंठपुर में फातीया किया गया एवं दरूद सलाम पढ़ा गया मोहर्रम के 1 तारीख से दसवीं तारीख तक मोहर्रम के ताकरीर एवं दरूद सलाम पेश की जाती है हुसैन की शान में और और आठवीं को जहां ताजिया बनाई जाती है उसी जगह पर हुसैन की शहादत को याद किया जाता है सारे मुस्लिम समाज उनकी शहादतओं का तकरीर 10 दिन तक मौलाना साहब के द्वारा बया की जाती है है हजरत इमाम ए हुसैन के रोजे के दीदार में बयान की जाती है

ईमान के लिए सर कलम करवा लिए हमारे लिए हुसैन इस्लाम को कोई मिटा सकता नहीं सजदे में सर कलम कर लिए गए ईमान पर आंच नहीं आने दिया हुसैन ने
मोहर्रम इमामे हुसैन यही हम सब को सिखाते हैं अगर आप जिंदा सलामत हो और ठीक हो यह आपके लिए एक मौका है हुसैन का शुक्र अदा करें हुसैन हम सबको दीन पर चलने की तौफीक अता फरमाए आपसी भाईचारा बने रहे हिंदू मुसलमान सिख इसाई में यही गंगाजमुनी तहलीज सिखाती है

आज का मुसलमान
1️⃣.. इमाम हुसैन कौन थे ??? नहीं पता ,,❓
2️⃣.. किस लिए शहीद हुए ??? नहीं पता,,❓
3️⃣.. कर्बला में कौन-कौन शहीद हुए ??? नहीं पता,,❓
4️⃣.. बीवी जेनब कौन थी ??नहीं पता,,❓
5️⃣.. अली असगर कौन थे??? नहीं पता,,❓
6️⃣.. जंग क्यों हुई थी??? नहीं पता,,❓
7️⃣.. किससे हुई??? नहीं पता,,❓
8️⃣.. कितने दिनों तक हुई??? नहीं पता,,❓
9️⃣.. 1 से 10 मोहर्रम के बीच क्या हुआ.? नहीं पता,❓
🔟.. कितनों को तो ये भी नहीं पता है
हजरत हुसैन रजि. का मोहम्मद ﷺ रिश्ता क्या था ?❓
आपको बता दें कि कितनी कुर्बानी देने पड़े है मेरे मुसलमान भाइयों सुनो शहादत की तकरीर, हजरत हुसैन रजि अल्लाह अनुह का अकीदा क्या था मन्हज क्या था आज हम हुसैनी होने का दावा तो करते हैं सिर्फ नारा लगाने के लिए इस्लाम हम तक काफी मुश्किल से पहुंचा है मेरे नबी ने पेट पर पत्थर बांधा है तब इस्लाम आगे बढ़ा है हजरत अमीरे हमजा का सीना चाक किया गया है कलेजा चबाया गया है तब इस्लाम आगे बढ़ा है हजरत अब्बास अलंबरदार के बाजू काटे गए हैं तब इस्लाम आगे बड़ा सैयदना साकीना का सब्र तार-तार किया गया है तब इस्लाम आगे बढ़ा है सैयदना सकीना की कान की बाली खींची गई है तब इस्लाम आगे बढ़ा है बड़े अफसोस की बात है जिन सहाबा ने इस्लाम के लिए शहादत कि आज हम उनकी शहादत का को याद करें और उन्हीं के बताए हुए नेक रास्ते पर चलें हम मुसलमानों में भाईचारा मोहब्बत होनी चाहिए अपने दिलों से नफरत को निकाल देना चाहिए एक दूसरे के बुरे वक्त में काम आना चाहिए हम मुस्लिम समाज के लोगों से गुजारिश करते हैं कि अपना बे फालतू वक्त जया ना करो सजदे में सर रखो पांचों वक्त कलाम पाक की तिलावत करो गुनाहों से तौबा करो हजरत हुसैन के बताए हुए रास्ते पर चलो आमीन l

