विधायक व अधिकारी कर रहे है सार्वजनिक कार्यक्रम में निरंतर अध्यक्ष की उपेक्षा आखिर क्यों भड़क गई जनपद पंचायत खड़गवा की अध्यक्ष सोनमती उर्रे

kamrun nisha

आखिर क्यों भड़क गई जनपद पंचायत खड़गवा की अध्यक्ष
आदिवासी महिला होने पर हो रही उपेक्षा का शिकार
विधायक व अधिकारी कर रहे है सार्वजनिक कार्यक्रम में निरंतर अध्यक्ष की उपेक्षा

चिरमिरी – खड़गवा। खड़गवां जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती सोनमती उर्रे ने प्रेस वार्ता कर उनकी निरंतर हो रही उपेक्षा को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।
जनपद पंचायत खड़गवा की अध्यक्ष सोनमती उर्रे ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत, कोरबा लोकसभा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ विनय जायसवाल के द्वारा कोडंगी में पुल निर्माण का भूमिपूजन गत दिवस किया गया। जिसमे मुझे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के द्वारा आमंत्रित किया जाना उचित नही समझा गया। इस दौरान मैं स्वयं कार्यक्रम में पहुंची और जमीन पर बैठ गई। मेरे वहा पहुंचते ही नेताओं और अधिकारियों में हड़बड़ी मच गई। जिसके बाद मुझे मंच पर बैठाया गया इस दौरान मैंने माइक लेकर उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी महिला होने का खामियाजा मुझे उठाना पड़ रहा है। निरंतर अधिकारियों और यहां के कांग्रेसी नेताओ के द्वारा मुझे अनदेखी किया जाता है। मैं आज अपनी पहचान की मोहताज नहीं हूं लेकिन मेरी पद की जो पहचान है कम से कम उसका सम्मान होना चाहिए। ज्ञात हो की ग्राम पंचायत कोडांगी के पास एक पुल के उद्घाटन के लिए मंच पर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत कोरबा संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत मनेंद्रगढ़ विधानसभा के विधायक डॉ विनय जायसवाल चिरमिरी नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती कंचन जायसवाल नगर पालिक निगम की सभापति श्रीमती गायत्री बिरहा के साथ कई ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव एवं अन्य कई प्रशासनिक अधिकारी के बीच जनपद पंचायत खड़गवा की अध्यक्ष पहुंची जहां एक तरफ उनके क्षेत्र में पुल के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित न किए जाने का दुख रहा। वहीं दूसरी ओर द्वेषपूर्ण भावनाओं को लेकर जनपद अध्यक्ष ने मंच से पूरे भड़ास के साथ कहा कि मुझे किसी प्रकार की जानकारी दी नहीं जाती। अभी 8 महीना चुनाव का बचा है मैं एक आदिवासी महिला हूं। मैं जिधर रहूंगी अपने आदिवासी समाज के साथ रहूंगी। अध्यक्ष श्रीमती सोनमती ने कहा कि मैं एक आदिवासी महिला हूं बार-बार मेरा तिरस्कार किया जाता है। कम से कम मेरे पद का सम्मान होना चाहिए आज मैं जिस पद पर हूं उस पद की गरिमा है लेकिन हर बार मुझे उपेक्षित किया जाता है ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी अन्य कई कार्यक्रमों में भी इस प्रकार की उपेक्षा की जाती रही है।

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