कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के आकलन हेतु दिशा निर्देश जारी जिला स्तरीय आकलन संबंधी वर्चुअल वेबीनार का आयोजन

kamrun nisha


कोरिया 26 अगस्त 2021/ जिले में आज जिला स्तरीय आकलन संबंधी वर्चुअल वेबीनार का आयोजन किया गया। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक एवं डाइट प्राचार्य ने जिले में स्कूली बच्चों के आकलन संबंधी दिशानिर्देशों के बारे में विकास खंड शिक्षा अधिकारी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विकासखंड स्रोत समन्वयकों कों विस्तृत जानकारी दी। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि विकासखंड स्तर द्वारा संकुल शैक्षिक समन्वयको को 26 अगस्त एवं शैक्षिक समन्वयक द्वारा 27 अगस्त को कक्षा 1 से 8 तक अध्यापन कराने वाले शिक्षकों को संकुल स्तर पर आकलन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सत्र 2021-22 में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के आकलन हेतु दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि कोविड महामारी के दुष्प्रभाव से शिक्षा जगत अछूता नहीं है।

कोविड महामारी के समय स्कूल बच्चों के लिए नहीं खुले। इसके बावजूद राज्य शासन ने बच्चों की शिक्षा की निरंतरता बनाए रखी। सीखने-सिखाने के वैकल्पिक और परिवेश अनुरूप तरीके अपनाए गए जैसे – पढ़ई तुंहर दुआर, पढ़ई तुंहर पारा, बुल्टू के बोल, लाउड स्पीकर, ऑनलाइन कक्षाएं आदि। इन प्रयासों ने शिक्षकों और समुदाय को बच्चों की शिक्षा से जोड़े रखा और अध्यापन कार्य की निरंतरता बनी रही। इन तमाम प्रयासों से बच्चों के सीखने पर क्या प्रभाव पड़ा, उन्होंने कितना सीखा और सीखने में कहाँ कठिनाई है, यह जानने के लिए बेसलाइन आकलन किया जा रहा हैं।
बेसलाइन आकलन से यह सुनिश्चित हो पाएगा कि बच्चे ने अब तक कितना सीखा और वर्तमान में उसका शैक्षिक स्तर किस कक्षा के अनुरूप है। इससे कक्षा अध्यापन करने में शिक्षकों को सहायता मिलेगी। कक्षा अध्यापन के दौरान बच्चों की शैक्षिक प्रगति जानने के लिए इकाई मूल्यांकन, बेसलाइन, मिडलाइन और एंडलाइन आकलन निर्धारित समयावधि में किया जाएगा। पूरे सत्र में 3 आकलन – बेसलाइन, मिडलाइन, एंडलाइन आकलन और 5 इकाई मूल्यांकन होंगे। इकाई मूल्यांकन विद्यालय आधारित होंगे। इकाई मूल्यांकन के अंकों एवं बच्चों द्वारा संपादित कार्यों का संधारण विद्यालय स्तर पर किया जाएगा। बेसलाइन, मिडलाइन एवं एंडलाइन आकलन के अंकों का संधारण राज्य स्तर पर किया जाएगा जिससे राज्य की शैक्षिक प्रगति का अवलोकन कर शैक्षिक योजना बनाकर विद्यार्थियों के उपलब्धि स्तर में वृद्धि की जा सके। आकलन की यह प्रक्रिया बहुत ही सहज, सरल एवं लर्निंग आउटकम्स पर आधारित होगी।

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