सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मौत के बाद मृतक के परिजनों ने सैकड़ो साथियों अस्पताल में उसके बाद कोतवाली पहुंचकर जमकर हंगामा एडिशनल एसपी निमेष बरैया पुलिस बल के साथ थाना परिसर में पहुंच गए. इधर मृतक के परिजन जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश तिवारी के इस्तीफे की मांग और उनके विरुद्ध कार्रवाई.
kamrun nisha
- मौत पर हंगामा स्थान-मनेन्द्रगढ़. जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश तिवारी के इस्तीफे की मांग

जिला मनेंद्रगढ़ में सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मौत के बाद मृतक के परिजनों ने अपने सैकड़ो साथियों के साथ पहले अस्पताल में उसके बाद फिर कोतवाली पहुंचकर जमकर हंगामा किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी निमेष बरैया पुलिस बल के साथ थाना परिसर में पहुंच गए. इधर मृतक के परिजन जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश तिवारी के इस्तीफे की मांग और उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग को लेकर देर रात तक थाना के सामने जमा रहे.
– मनेन्द्रगढ़ शहर के मौहार पारा इलाके में रहने वाला नारायण पतवार नामक एक युवक शुक्रवार की दोपहर एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था. घायल युवक उसके परिजन शाम लगभग 4:00 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे यहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने उनका प्राथमिक उपचार तो किया लेकिन परिजन बार-बार डॉ सुरेश तिवारी को फोन लगाते रहे लेकिन वह एक बार भी मरीज को देखने के लिए नहीं पहुंचे. इस बीचघायल नारायण पवार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. पतवार की मौत की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा मचाना शुरू कर दिया. इस बीच सीएमएचओ डॉक्टर सुरेश तिवारी को अस्पताल में देखकर मरीज के परिजन उन्हें मारने के लिए दौड़ाने लगे तब किसी तरह डा.तिवारी कोतवाली पहुंचे और अपनी जान बचाई.डॉ सुरेश तिवारी की कोतवाली पहुंचते ही भारी संख्या में मरीज के परिजनों के साथ आसपास के लोग भी कोतवाली में जमा होने लगे और सभी डॉक्टर सुरेश तिवारी के इस्तीफे की मांग करते हुए विधिक कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाने लगे. इधर मरीज के परिजन थाने में हंगामा मचा रहे थे, वहीं दूसरी ओर जब इस बात की खबर अस्पताल के स्टाफ को लगी तो पूरा स्टाफ अस्पताल छोड़कर बाहर भाग गया, जिसके चलते अस्पताल में भर्ती मरीज परेशान होते रहे. क्या देर रात तक मृतक के परिजन कोतवाली में जमा रहे. मृतक के परिजन इस दौरान काफी आक्रोशित रहे, उनका कहना था कि डॉ सुरेश तिवारी का पूरा ध्यान उनके अपने निजी अस्पताल में रहता है यही वजह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल पाता. फिलहाल हंगामा भी थमा नहीं है, क्योंकि मृतक के परिजनों ने साफ कहा कि जब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होगी वह मृतक के शव को अस्पताल से लेकर नहीं जाएंगे और ना ही उसका अंतिम संस्कार करेंगे.

