विवादों से नाता रखनें वाली धनेश्वरी राजवाडे ने सिटी कोतवाली प्रभारी व खाद्य निरिक्षक पर लगाया आरोप

कमरून निशा
मुख्यालय कोरिया 18 मई। बैकुण्ठपुर में लगातार विवादों से नाता रखने वाली धनेश्वरी राजवाड़े जो कभी शासकीय उचित मुल्य की दुकान चलाती थी। दुकान का संचालन करनें के सांथ ही वह बैकुण्ठपुर शहर के क ई होटलों व मिट्टी तेल माफियाओं को मिट्टी तेल, शक्कर, चना व चावल का काला बाजारी जमक करती थी। इस धनेश्वरी राजवाडे के उपर कुछ जनप्रतिनिधि का हांथ भी कुछ गलत कामों के कारण रहता था। जिसके दम पर वह हर गलत काम करनें व करवानें मे माहिर हुआ करती थी।। किन्तु बिते वर्ष 2018 मे एक दैनिक अखबार मे उसके कारनामों मे बारे मे प्रकाशित किया गया था। तब धनेश्वरी ने उक्त अखबार के रिपोटर पर झुठा छेडछाड का आरोप लगाई थी। जो जांच के उपरांत झुठा साबित हो गया वह भी धनेश्वरी के झुठे गवाह भी धनेश्वरी के दबाव मे झुठा बयान देना कबुल लिया था। इतना ही नही धनेश्वरी राजवाडे के द्वारा दर्जनों से अधिक छेडछाड व अन्य प्रकार के झुठे मामले कई लोगों के खिलाफ दर्ज करा चुकी है। अब तो हद ही हो गई, जब धनेश्वरी राजवाडे नें बैकुण्ठपुर सिटी कोतवाली प्रभारी, आरक्षकों सहित खाद्य विभाग के निरिक्षक के उपर झुठा आरोप लगाते हुए शिकायत तक कर दी है। इतना ही नहीं धनेश्वरी राजवाडे ने अनुविभागिय दण्डाधिकारी राजस्व को भी न पहचानते हुए नरकेली सोसाईटी मे अधिकारी से दुरव्यवहार भी की थी। धनेश्वरी के द्वारा चलाए जानें वाली नरकेली व जामपारा की सोसाईटी मे भ्रष्टाचार करते पकडानें के बाद छीन लिया गया है,�तब से धनेश्वरी उतावली हो गई है, तथा उतावले पर मे आ कर शिकायत कर रही है। जिस गांव मे धनेश्वरी राजवाडे रहती थी उस गांव के रहवाशियों को लगातार परेसान करना व देह व्यापर खुलेआम करानें से लोग परेसान हो कर सिटी कोतवाली मे कई बार लिखित व मौखिक शिकायत भी किए थे उस पर कार्यवाही भी हुई थी। ग्रामिणों की मानें तो धनेश्वरी जब देह व्यापार का धन्धा खुलेआम करनेंं लगी थी तब, ग्राम वाशियों की महिलाऐं एक राय होकर देहव्यापर कर रही औरत व लडकियो सहित धनेश्वरी को दौडा दौडा कर गांव मे ही मारते मारते गांव से भगा दिए थे। इसके बाद भी धनेश्वरी अपने आदत से बाज नहीं आई और उसनें सोसाईटी के आड मे भ्रष्टाचार करनें लगी। भ्रष्टाचार करते करते पुलिस के हत्तथे चढी और लाल गेट के अंदर पहुंच गई। जिसके बाद वह दोनों सोसाईटी से हांथ धो बैठी और उतावली हो कर शासकीय कर्मचारियों की शिकायत करनें लगी वह भी उन शासकीय कर्मचारियों की जिनके कार्यों की सराहना विभाग सहित आम जनता भी करते नहीं थकते है।

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