कोरियाछत्तीसगढ़

मुहर्रम, पैगंबर मुहम्मद के नवासे, हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला की जंग में हुई शहादत को याद किया जाता है ताजिया बनाया जाता है मिलाद और फतिया दरूद किया

: ताजिया मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा मुहर्रम पैगंबर मुहम्मद के नवासे, हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला की जंग में हुई शहादत को याद किया जाता है फतिया दरूद की गई क्षेत्र में सुख-शांति बना रहे ।

ताजिया बांस, लकड़ी, रंगीन कागज और फूलों से बनाया जाता है इमाम हुसैन के मकबरे की एक खूबसूरत प्रतीकात्मक (मॉडल) होती है
जिला कोरिया बैकुंठपुर बाईसागर इमामबाड़ा में ताजिया बनाई गई है हर साल के भांति- इस साल भी बड़े ही धूमधाम से चांद देखने के बाद हसन हुसैन की याद में मिलाद शरीफ हसन हुसैन की इबादत और शहादत जिक्र की जाती है।

मुस्लिम सामुदायिक के द्वारा शरबत की व्यवस्था की गई

जुनापारा बैकुंठपुर मे भी ताजिया बनाई गई और मिलाद शरीफ में हसन हुसैन जिक्र किया गया उनकी शहादत के बारे मे बताया गया मौलवी साहब के द्वारा
एक तरफ बेशुमार लश्कर था
दूसरी तरफ 72 वफादार साथी थे मगर कर्बला ने बता दिया दुनिया को की हक की राह पर चलने वालों की असली ताकत ईमान होता है


इस्लाम कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की दसमी तारीख पर बैकुंठपुर में भाईचारे देखने को मिला। हज़रत इमाम हसैन और हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुस्लिम समुदाय द्वारा आयोजन किया गया कुमार चौक बैकुंठपुर में भाला बरछी डंडा खेल का प्रदर्शन शांतिपूर्वक कि गई,,, बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। बैकुंठपुर कोरिया जिले में “या हुसैन या हुसैन” का नारा गूंज वातावरण शांतिपूर्वक ।
कर्बला की जंग में हज़रत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ ईमान के लिए बलिदान दिया

सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे ने स्वयं खड़ी रहीऔर पुलिसकर्मी जवान को तैनात किया गया। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम पर लगातार नजर बनाए रखा, जिससे मोहर्रम का आयोजन शांतिपूर्ण, संपन्न हुआ। और ताजिया को कर्बला में समर्पित किया गया।

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