कोरियाछत्तीसगढ़

बिना सूचना छात्र के आश्रम से अनुपस्थित रहने पर अधीक्षक निलंबित एसडीएम सोनहत को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश, जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

kamrun nisha

कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने की कार्रवाई, उच्चाधिकारियों को सूचना नहीं देने पर जताई नाराजगी

कोरिया, 09 सितंबर 2026/ आदिवासी बालक आश्रम मझारटोला में छात्र के बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने तथा इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं देने के मामले को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव ने गंभीरता से लिया है।

कलेक्टर ने आश्रम अधीक्षक श्री अशोक एक्का को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सोनहत को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 08 सितंबर 2026 को आदिवासी बालक आश्रम मझारटोला के छात्र प्रिंस, पिता बिजेन्द्र सिंह, कक्षा 4वीं, सुबह 7 बजे से बिना किसी सूचना के आश्रम में उपस्थित नहीं था। छात्र के आश्रम में नहीं होने की जानकारी आश्रम अधीक्षक श्री अशोक एक्का द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता मानते हुए कलेक्टर ने कार्रवाई की है।

कलेक्टर ने श्री अशोक एक्का के उक्त कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के प्रावधानों के विपरीत पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।

एसडीएम सोनहत करेंगे पूरे मामले की जांच
कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सोनहत को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में छात्र के आश्रम से अनुपस्थित होने की परिस्थितियों, आश्रम प्रबंधन की भूमिका तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी का परीक्षण किया जाएगा। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

निलंबन अवधि में श्री अशोक एक्का का मुख्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, कोरिया कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। निलंबन आदेश तत्काल प्रभावशील रहेगा।

कलेक्टर ने आश्रमों एवं छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, नियमित उपस्थिति और सतत निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा एवं देखरेख में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी -कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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