कक्ष क्रमांक 345 में बड़े पेड़ों की कटाई का मामला, मैदानी वन अमले की निगरानी पर उठे सवाल देवगढ़ वन परिक्षेत्र में पेड़ों की कटाई से मचा हड़कंप रक्षक ही भागचक????
kamrun nisha

देवगढ़ वन परिक्षेत्र में पेड़ों की कटाई से मचा हड़कंप
कक्ष क्रमांक 345 में बड़े पेड़ों की कटाई का मामला, मैदानी वन अमले की निगरानी पर उठे सवाल
मौके पर पड़ी मिलीं कटी लकड़ियां, रेंजर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल—जांच की मांग
कोरिया। देवगढ़ वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 345 में बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में कई पेड़ों को काटा गया है और कटाई के बाद लकड़ियां मौके पर ही पड़ी हुई हैं।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जंगल की सुरक्षा और वन क्षेत्र में नियमित गश्त को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वन क्षेत्र में बड़े पेड़ों की कटाई हुई है तो इसकी जानकारी मैदानी वन अमले को समय रहते क्यों नहीं हुई।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बीट स्तर पर वनकर्मियों की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में कक्ष क्रमांक 345 में पेड़ों की कटाई होना मैदानी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पेड़ों की कटाई कब और कैसे हुई तथा इसकी जानकारी संबंधित अमले को थी या नहीं।
रेंजर की भूमिका की भी जांच की मांग
मामले में संबंधित वन परिक्षेत्र के रेंजर की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पेड़ों की कटाई किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। स्थानीय स्तर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की स्थल जांच कराने तथा कटे पेड़ों की संख्या और लकड़ी की मात्रा का आकलन कराने की मांग की जा रही है।
वन विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

