सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया की दी गई जानकारी
kamrun nisha

सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित
जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया की दी गई जानकारी
कोरिया, सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सूचना आयोग के दिशा-निर्देशों तथा कलेक्टर रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में गुरुवार को जिला कोरिया के कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रथम अपीलीय अधिकारियों, नोडल अधिकारियों एवं राज्य जन सूचना अधिकारियों को सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, उनके दायित्वों तथा ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
सूचना का अधिकार प्रशासनिक पारदर्शिता का सशक्त माध्यम
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को लोक प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन उपलब्ध सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सहायता करना है।
अधिनियम के अंतर्गत सूचना चाहने वाले नागरिकों के आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करना, अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण करना, सूचना उपलब्ध कराने में वैधानिक प्रावधानों का पालन करना तथा अपील संबंधी प्रक्रियाओं का समयबद्ध निर्वहन करना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के दायित्वों पर दिया गया जोर
प्रशिक्षण में जन सूचना अधिकारियों को सूचना आवेदन प्राप्त करने, निर्धारित समय-सीमा में उत्तर देने, संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने तथा सूचना देने से इनकार किए जाने की स्थिति में अधिनियम की संबंधित धाराओं के अनुरूप कारण बताने की प्रक्रिया समझाई गई।
अधिकारियों को विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी दी गई—
- आवेदन का समयबद्ध निराकरण: सामान्यतः सूचना आवेदन का निराकरण 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। जीवन एवं स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में सूचना 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
- प्रथम अपील की प्रक्रिया: निर्धारित अवधि में सूचना प्राप्त नहीं होने अथवा प्राप्त उत्तर से असंतुष्ट होने पर आवेदक प्रथम अपील प्रस्तुत कर सकता है। प्रथम अपीलीय अधिकारी को अधिनियम के अनुसार अपील का निराकरण करना होता है।
- सूचना देने से छूट: धारा 8 एवं अन्य संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत अपवादों, सूचना देने से छूट तथा धारा 10 के तहत पृथक्करण के सिद्धांत की जानकारी दी गई।
- स्वतः सूचना प्रकटीकरण: धारा 4 के अंतर्गत लोक प्राधिकारियों द्वारा महत्वपूर्ण सूचनाओं का स्वतः प्रकटीकरण एवं नियमित अद्यतन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
- अभिलेखों का संधारण: विभागीय अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव, सूचना की उपलब्धता तथा संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई।
- ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग: अधिकारियों को पोर्टल पर पंजीयन, विभाग एवं कार्यालय का विवरण दर्ज करने, अधिकारी की भूमिका निर्धारित करने तथा ऑनलाइन आवेदन एवं अपील से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
डिजिटल व्यवस्था एवं जवाबदेही को मजबूत बनाने पर बल
प्रशिक्षण के दौरान ऑनलाइन पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को सरल, व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के संबंध में अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया गया। पोर्टल पर सही विभागीय जानकारी, संबंधित अधिकारियों का विवरण तथा जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि सूचना के अधिकार से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निराकरण हो सके।
इस अवसर पर जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर मारुति शर्मा, कार्तिकेय शर्मा एवं चेतनारायण कश्यप ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की भूमिका तथा ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम में जिले के सूचना के अधिकार के नोडल अधिकारी डीएमसी अरविंद सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जिले में सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराना तथा पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितकारी प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना रहा।

