कृषि विज्ञान केंद्र -कोरिया दवारा गौठान ग्राम क्रमशः कुशाह, पौड़ी, छरछा, रोझी, जामपानी, कोडीमार व सोरगा में कुल 35 एकड़ क्षेत्रफल में मनरेगा व केवीके अभिसरण से हल्दी की उन्नत प्रजातियों – रोमा, रशिम व बी.एस.आर.-2 का रोपण वर्ष 2020-21 में किया गया था।

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गौठान ग्रामों के हल्दी प्रक्षेत्रों से हल्दी की सुखी पत्तियों से निकल रहा सगंध हल्दी तेल
कोरिया कलेक्टर श्री एस. एन. राठौर (आई.ए.एस.) के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र-कोरिया ने भाप आसवन संयंत्र से निकाला सगंध हल्दी तेल
कोरिया 05 अप्रैल 2021/ कृषि विज्ञान केंद्र -कोरिया दवारा गौठान ग्राम क्रमशः कुशाह, पौड़ी, छरछा, रोझी, जामपानी, कोडीमार व सोरगा में कुल 35 एकड़ क्षेत्रफल में मनरेगा व केवीके अभिसरण से हल्दी की उन्नत प्रजातियों – रोमा, रशिम व बी.एस.आर.-2 का रोपण वर्ष 2020-21 में किया गया था। हल्दी की उन्नत प्रजातियों को इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, हाई अलटीऊड रिसर्च स्टेशन, ओड़ीसा तथा तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, कोयम्बटूर से आयातित किया गया ताकि जिले में हल्दी की नवीनतम प्रजातियों का प्रचार व प्रसार हो सके। हल्दी फसल में जब फरवरी- मार्च माह में पत्तियां सुख जाती है तब सुखी पत्तियों की कटाई कराकर भाप आसवन संयंत्र से सगंध हल्दी तेल निकाला जा रहा है। एक एकड़ क्षेत्रफल से लगभग 300 से 400 किलोग्राम सुखी पत्तिया इकट्ठी हो जाती है जिससे 1.5 से 2 किलोग्राम सगंध हल्दी तेल निकल जाता है। इस प्रकार लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल से अनुमानित 50 से 55 लीटर सगंध हल्दी तेल निकाला जा सकेगा। विपणन क्षेत्र में खुले बाजार में हल्दी तेल की कीमत रूपए 3000 से 5000 प्रति किलोग्राम है। हल्दी तेल के विक्रय से प्राप्त शुद्ध आय को बराबर अनुपात में क्षेत्रफल अनुसार ग्राम गौठान समितियों को वितरित कर दिया जावेगा।
हल्दी तेल एंटीऑक्सिडेंट से समृद्ध है और इसमें शक्तिशाली सूजनरोधी गुण हैं। आवश्यक तेल में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं और इसमें एंटी-एलर्जी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-फंगल गुण होते हैं जो त्वचा और बालों पर चमत्कार की तरह काम करते हैं। हल्दी तेल में फरानोगर्मेनोन (7.8ः), कम्फोर (7.5ः), (जेड)-3-हेक्सेनॉल (5.8ः), और फुरानोडिएनोन (5.1ः) मुख्य वाष्पशील योगिक होते है। सामान्य रूप से हल्दी तेल, स्वास्थ्य रखरखाव और रोगों के उपचार के लिए कई लाभकारी प्रभाव दिखाते हैं। वर्तमान में हल्दी तेल का उपयोग हस्त निर्मित साबुन एवं 15 मिली की बोतल पैकिंग में उपयोग कर विपणन किया जा रहा है। भविष्य में कॅरिअर आयल के साथ हल्दी तेल क® मिलाकर बॉडी आयल के रूप में किसान उत्पादक संगठन के कृषकों द्वारा केवीके कोरिया के तकनिकी मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग से विक्रय किया जावेगा।
इस वर्ष हल्दी की पत्तियों की कटाई करके रेटून फसल के रूप में अगले वर्ष ले जाया जा रहा है ताकि पुनः हल्दी तेल निकाला जा सके व साथ ही साथ हल्दी राईजोम की दुगनी उपज प्राप्त हो सके। अगले वर्ष 35 एकड़ क्षेत्रफल से लगभग 320-330 टन तक का हल्दी राईजोम की उपज प्राप्त होगी। प्राप्त उपज का 50 प्रतिशत भाग लगभग 150-160 टन हल्दी की बिक्री ग्राम गौठान समिति द्वारा केवीके तकनिकी मार्गदर्शन में किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य या राष्टीय स्तर पर किया जावेगी। शेष बची हुई 150-160 टन हल्दी को अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन में जिले में प्रदर्शित किया जावेगा।

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