आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारी सरगुजा संभाग के अध्यक्ष प्रभाकर सिंह जी का कहना है सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए एवं 50 लाख का स्वास्थ बीमा किया जाए, एवं धान जिसका अभी तक उठाव नहीं हुआ , उसकी भी क्षति पूर्ति दी जाए समिति किसी भी प्रकार की भरपाई करने में असमर्थ है,

कोरिया जिला से कमरुन निशा की रिपोर्ट

आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारी सरगुजा संभाग के अध्यक्ष प्रभाकर सिंह जी का कहना है सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए एवं 50 लाख का स्वास्थ बीमा किया जाए, एवं धान जिसका अभी तक उठाव नहीं हुआ , उसकी भी क्षति पूर्ति दी जाए समिति किसी भी प्रकार की भरपाई करने में असमर्थ है, नहीं तो सभी समितियां डूब जायेंगी, घाटे में चली जाएंगे ।।
इस कोरोना महामारी में कार्य करते हुए हमारे समिति के कर्मचारी काल की गाल में चले गए, उनके परिवार के सदस्यों का सुध लेने वाला कोई भी नहीं है ना शासन ना प्रशासन ना जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के कोई अधिकारी।। अब तो सहकारी समिति के कर्मचारी भी कहने लगे हैं कि हम अपनी जान नहीं गंवा सकते हमारे परिवार का क्या होगा, कौन लेगा हमारे परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी ???

1.सरगुजा संभाग में अभी तक खाद बीज का भंडारण सहकारी समितियों में नहीं करवाया गया है यह किसकी लापरवाही और उदासीनता के कारण हो रहा है समझ से परे है।। इस बार खाद बीज वितरण करने में समिति कर्मचारी असमर्थ है क्योंकि अचानक इतना ज्यादा भीड़ हो जाएगा कि कई समितियों के कर्मचारी कोरोना महामारी में संक्रमित हो सकते हैं और कईयों की जान जा सकती है।
समिति कर्मचारियों के द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की बहुत सारी योजनाओं का संचालन धरातल स्तर पर किया जाता है , कृषकों को नगद ऋण वितरण, खाद बीज वितरण एवं उनके फसल का बीमा समिति स्तर से ही किया जाता है इस दौरान रिकॉर्ड में 20 जगह कृषकों का हस्ताक्षर लेना होता है एवं पोस मशीन में कृषकों का अंगुठा लगावाया जाता है, जिससे संक्रमण की अपार संभावनाएं होती है।। विगत वर्ष माह मई तक समितियों के द्वारा कृषकों को लगभग 50% नगद ऋण वितरण एवं खाद बीज का वितरण किया जा चुका था किंतु इस वर्ष खाद बीज के अभाव मेंअभी तक जिले की किसी भी समिति में खाद बीज वितरण की बोहनी तक नहीं हुई है।। चूंकि सभी समितियों में कृषकों की संख्या 1000 से लेकर 3000 तक है अतः समितियों में भारी भीड़ होना स्वाभाविक है, जिससे संक्रमण बहुत तेज गति से फैलेगा और ऐसे में कार्य करना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा होगा।। उसके बाद भी कर्मचारियों के हित में किसी भी प्रकार का समर्थन शासन के द्वारा नहीं मिलना कर्मचारियों में निराशा एवं असंतोष फैला रहा है ।।।
अब समिति कर्मचारी भी इस कोरोना महामारी में कार्य करने से कतरा रहे हैं यदि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा अपने घोषणा पत्र के आधार पर समान कार्य समान वेतन नहीं दिया जाएगा और समिति के कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाएगा तो सहकारी समिति में पूर्ण रूप से कार्य बंद होगा समिति कर्मचारी के परिवार भी समिति में कार्य करने जाने पर मना कर रहे हैं एवं घर परिवार मैं भी भय का वातावरण बना हुआ है।। इस वर्ष खाद ऋण वितरण में भीड़ होना स्वाभाविक है ऐसे में अल्प वेतन में अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करने से समिति कर्मचारी भी मना ही कर रहे हैं।

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