अंधविश्वास से नहीं वैज्ञानिकता से मिलेगी कोरोना से मुक्ति : आफताब ० दीये के बजाए प्रदेश सरकार ने गरीबों के चूल्हे जलाने पर दिया जोर

राशिद जमाल सिद्दीकी की रिपोर्ट
राजनांदगांव। कांग्रेस नेता आफताब आलम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा 5 अप्रैल को रात 9 बजे घरों में दीया जलाने की अपील पर ऐतराज जताते कहा कि अंधविश्वास से वैश्विक महामारी कोरोना से मुक्ति कतई नहीं मिलेगी, बल्कि इस संक्रमण से निपटने के लिए संघर्ष एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही एकमात्र माध्यम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चीन में महामारी का रूप लेने के बाद लॉकडाउन के लिए पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सलाह दी थी। उस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने उनकी सलाह का माखौल उड़ा दिया था। आज आखिरकार देश को 21 दिन के लॉकडाउन के चलते बंद कर दिया गया है।
श्री आलम ने कहा कि 30 जनवरी को देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था, उस दौरान भी विदेशों से विमानों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग कांग्रेस ने की थी। उन्होंने इस बात पर आपत्ति करते कहा कि दीया जलाने के लिए देश की जनता को 3 दिन का वक्त दिया गया, जबकि लॉकडाउन करने के लिए मात्र 6 घंटे का समय मुहैया कराया गया। यह फैसला केंद्र सरकार की अपरिपम्ता का परिचायक है। उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन के कारण केंद्र सरकार के नाक के नीचे दिहाड़ी मजदूरों को बेसमय पलायन करना पड़ा। बिना बंदोबस्त के मजदूरों को भटकने के लिए छोड़ दिया गया। ऐसे में कुछ मजदूरों को लॉकडाउन की वजह से पैदल सफर करने का जोखिम उठाते दम तोड़ दिया और प्रधानमंत्री हाथ पर हाथ धरे बैठे मजदूरों की मौत को देखते रहे। श्री आलम ने कहा कि मोदी सरकार की असक्षमता पर यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने ऐसे विकट परिस्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जीवटता और उनकी इस विषम परिस्थिति से निपटने हेतु लिए गए निर्णय कारगर साबित हुए। जिसके कारण प्रदेश की 60 प्रतिशत कोरोना पीड़ित मरीज जहां अपने घर पहुंच गए हैं। वहीं प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण सीमित है। श्री आलम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री बघेल के कार्यों का अनुशरण करना चाहिए, ताकि देश में विकराल रूप ले रहा संक्रमण पर रोक लग सके।
