प्रकृति ने सरगुजा को दी है अकूत सुंदरता और सुकून एल.डी.मानिकपुरी सहायक जनसंपर्क अधिकारी

kamrun nisha.

प्रकृति ने सरगुजा को दी है अकूत सुंदरता और सुकून

कोरिया 23 फरवरी 2024।
छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने भरपूर आशीष दी है। जब सरगुजा सम्भाग की बात करें तो प्रकृति की गोद में बसे और हरियाली की चादर से ढंके हैं मानो यह जन्नत की नगरी कश्मीर हो।

तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा किया गया।

वर्ष 2012 में हुई थी शुरूआत
बता दें मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा विकास को गति देने के लिए वर्ष 2012 में जिला प्रशासन सरगुजा द्वारा मैनपाट महोत्सव की शुरुआत की थी। इस तरह हर वर्ष मैनपाट महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय व देश के नामी कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाती है और विभागीय स्टॉलों से विकास की झलक देखने को मिलती है तो यहां एडवेंचर स्पोर्ट्स, नौकायन, पतंग फेस्ट, मेला, दंगल आदि गतिविधियां लोगों के मनोरंजन का माध्यम बनते हैं।

इस वर्ष तीन दिवसीय महोत्सव
तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव 23 फरवरी से 25 फरवरी तक रोपाखार जलाशय के समीप आयोजन किया गया है।

समुद्र सतह से 3781 फीट ऊंचाई पर
मैनपाट विन्धपर्वत माला पर स्थित है, जिसकी समुद्र सतह से ऊंचाई 3781 फीट है इसकी लम्बाई 28 किलोमीटर और चौडाई 10 से 13 किलोमीटर है। राजधानी रायपुर से अम्बिकापुर की दूरी लगभग 365 किमी है, वहीं अम्बिकापुर से मैनपाट की दूरी लगभग 50 किमी है। यहां की जलवायु के कारण मैनपाट को छत्तीसगढ का शिमला कहा जाता है।

प्रदेश के चारों दिशाओं में विराजी है मातेश्वरी
बस्तर से लेकर सरगुजा अपनी नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है वहीं चारो दिशाओं में दंतेश्वरी माई, माँ बम्लेश्वरी, माँ महामाया, माँ चंद्रहासिनी विराजी है, जिनकी आशीर्वाद इस प्रदेश को सतत मिल रही है।

संस्कृतियों का संगम स्थल
पर्यटन की दृष्टि से सरगुजा सम्भाग का बड़ा स्थान है। मैनपाट जहां सुंदर वादियां, खुशनुमा वातावरण और ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरा, विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल है। जहां पहुंचते ही मन को सुकून व अलौकिक शांति की प्राप्ति होती है।

मुख्यमंत्री ने की घोषणा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देवसाय ने मैनपाट महोत्सव के लिए 50 लाख रुपए की घोषणा की तो नर्मदापुर में झंडा पार्क बनाने के लिए एक करोड़ रूपए देने की घोषणा की। श्री साय ने मैनपाट को पंचमढ़ी की तरह और छत्तीसगढ़ का शिमला बताया।

दूर तक फैला पाट क्षेत्र
मैनपाट के नयनाभिराम दृश्य स्वतः ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहां चारों ओर फैली हरियाली, घुमावदार पहुँचमार्ग, मन को असीम शीतलता प्रदान करने वाले जलप्रपात, अचंभित करने वाले प्राकृतिक दृश्य और दूर-दूर तक फैला पाट क्षेत्र है।

मैनपाट में है खुशनुमा वातावरण
वैसे तो मैनपाट का मौसम वर्षभर खुशनुमा होता है, परन्तु नवम्बर से जनवरी के मध्य सर्दियों के मौसम में मैनपाट की खूबसूरती और बढ़ जाती है। बारिश के बाद झरनों की सुंदरता, चारों ओर खेतों में लहलहाती हुई टाऊ की फसल दर्शनीय होती है। इसलिए ये मौसम मैनपाट में सैर करने के लिए सबसे अच्छा मौसम है।

आलू और टाऊ की खेती के लिए प्रसिद्ध
सरगुजा सम्भाग वैसे तो अनेक संसाधनों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यहां आलू की खेती देश के अलग अलग राज्यों तक पहुंचती है। इसी तरह टाउ की खेती भी इस अंचल में बड़ी सँख्या में की जाती जो प्रसिद्ध है।
प्रमुख पर्यटन स्थल –
बौद्ध मंदिर
मैनपाट से ही रिहन्द एवं मांड नदी का उदगम हुआ है। इंडो-चाइना वार के पश्चात 1962-63 में तिब्बती शरणार्थियों को मैनपाट में बसाया गया। यहां तिब्बती लोगों का जीवन एवं बौद्ध मंदिर आकर्षण का केन्द्र है। इसलिए इसे मिनी तिब्बत भी कहा जाता है।
टाइगर प्वाइंट–
मैनपाट के महत्वपूर्ण प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट में टाइगर प्वाइंट का अपना विशेष महत्व है। टाइगर प्वाइंट एक खूबसूरत प्राकृतिक झरना है जिसमें पानी इतनी तेजी से गिरता है कि शेर के गरजने जैसी आवाज आती है। चारों तरफ घनघोर जंगलों के बीच पहाड़ से गिरता हुआ झरना बहुत ही आकर्षक लगता है।
उल्टापानी –
मैनपाट के बिसरपानी गांव में स्थित उल्टापानी छत्तीसगढ़ की सबसे ज्यादा अचंभित और हैरान करने वाला दर्शनीय स्थल है। यहां पर पानी का बहाव नीचे की तरफ न होकर ऊपर यानी ऊँचाई की ओर होता है। यहां सड़क पर खड़ी न्यूट्रल चारपहिया गाड़ी 110 मीटर तक गुरूत्वाकर्षण के विरूद्ध पहाड़ी की ओर अपने आप लुढ़कती है।
जलजली–
मैनपाट में प्रकृति के नियमों से दूर जलजली वह पिकनिक स्पॉट है जहाँ दो से तीन एकड़ जमीन काफी नर्म है और इसमें कूदने से धरती गद्दे की तरह हिलती है। आस-पास के लोगों के मुताबिक कभी यहां जल स्त्रोत रहा होगा जो समय के साथ उपर से सूख गया तथा आंतरिक जमीन दलदली रह गई। इसी वजह से यह जमीन दलदली व स्पंजी लगती है।
फिश प्वाइंट–
मैनपाट में पर्यटकों के लिए जंगलों के बीच एक रोमांचकारी और मन को लुभाने वाला मशहूर जगह फिश प्वाइंट (मछली) स्थित है। यह भी एक जलप्रपात है।
मेहता प्वाइंट–
मैनपाट में स्थित मेहता प्वाइंट ऊंची पहाडियां, गहरी घाटियां तथा वन मनोरम दृश्यों से भरपूर हैं। मैनपाट आने वाले पर्यटक सुंदर व्यू का आनन्द लेने के लिए इस पिकनिक स्पॉट में अवश्य पहुंचते हैं।
ठिनठिनी पत्थर-
अम्बिकापुर के 12 किमी. की दूरी पर दरिमा हवाई अड्डा हैं। दरिमा हवाई अड्डा के पास बडे-बडे पत्थरो का समूह है। इन पत्थरो को किसी ठोस चीज से ठोकने पर आवाजे आती है। सर्वाधिक आश्चर्य की बात यह है कि ये आवाजे विभिन्न धातुओ की आती है। इनमे से किसी- किसी पत्थर खुले बर्तन को ठोकने के समान आवाज आती है। इन पत्थरो मे बैठकर या लेटकर बजाने से भी इसके आवाज मे कोई अंतर नही पड़ता है। एक ही पत्थर के दो टुकडे अलग-अलग आवाज पैदा करते है। इस विलक्षणता के कारण इस पत्थरो को अंचल के लोग ठिनठिनी पत्थर कहते है।
इसके अतिरिक्त यहां बूढ़ा नागदेव जलप्रपात है जिसे जलपरी प्वाइंट भी कहते है। प्रकृति की गोद में बसे इस जलप्रपात तक पहुंचते ही सारी थकान दूर हो जाती है।

: एल.डी.मानिकपुरी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी

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