स्वतंत्रता दौड़ में दौड़ा कोरिया, हजारों हाथों में लहराया तिरंगा विधायक भईया लाल राजवाड़े बोले-तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक, देशप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं
kamrun nisha

स्वतंत्रता दौड़ में दौड़ा कोरिया, हजारों हाथों में लहराया तिरंगा
विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े बोले-तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक, देशप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं
कोरिया, / 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कोरिया देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। पुलिस लाइन बैकुंठपुर से रामानुज मिनी स्टेडियम तक आयोजित जिलास्तरीय स्वतंत्रता दौड़ में हजारों जिलेवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथों में तिरंगा और देशभक्ति की तख्तियां थामे प्रतिभागियों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष के साथ दौड़ लगाई।
मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े ने कहा कि तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है। देश की स्वतंत्रता के लिए वीर जवानों और समाज के हर वर्ग के लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि देशप्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं है और हमें स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए।
सद्भावना दौड़ में कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक श्री हरीश राठौर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री योगेंद्र श्रीवास, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े, गणमान्य नागरिक श्री देवेंद्र तिवारी, श्री शैलेश शिवहरे, श्री कृष्ण बिहारी जायसवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, पुलिस जवान, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में जिलेवासी शामिल हुए।
बारिश में भी नहीं थमा देशप्रेम का जोश
मिनी स्टेडियम में विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े जब उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे, तभी हल्की बारिश शुरू होने लगी, लेकिन बारिश की बूंदें भी छात्र-छात्राओं के उत्साह और देशप्रेम की उमंग को कम नहीं कर सकीं। विद्यार्थी पूरे अनुशासन के साथ तिरंगा थामे अपने स्थान पर डटे रहे। उनके चेहरे पर देशभक्ति का जोश और मन में तिरंगे के प्रति सम्मान साफ नजर आया। ऐसा लगा मानो बारिश से भी मुकाबला करने का हौसला इन युवा देशभक्तों ने अपने भीतर संजो रखा हो। हालांकि कुछ ही देर बाद बारिश थम गई और कार्यक्रम उत्साह के साथ आगे बढ़ा।
वंदे मातरम् बना राष्ट्रीय उद्घोष
कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में वंदे मातरम् ने महज एक गीत से आगे बढ़कर राष्ट्रीय उद्घोष का रूप लिया था। इसने लोगों में मातृभूमि के प्रति प्रेम, स्वाभिमान, एकता और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की भावना को मजबूत किया। सद्भावना दौड़ में भी इसी भावना की झलक दिखाई दी।

