टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में सोनहत की मजबूत पहल टीबी मुक्त विकासखंड बनने की ओर अग्रसर सोनहत, घर-घर स्क्रीनिंग, एक्स-रे एवं आधुनिक जांच अभियान तेज
kamrun nisha

टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में सोनहत की मजबूत पहल

कोरिया, / राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में अभियान को और तेज किया गया है। छत्तीसगढ़ में टीबी मुक्त विकासखंड की दिशा में चयनित चार विकासखंडों में सोनहत को भी शामिल किया गया है। अब विकासखंड में किए जा रहे कार्यों और उपलब्धियों का निर्धारित मानकों के आधार पर राज्य स्तरीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए राज्य द्वारा नामांकित जिला सूरजपुर की टीम सोनहत पहुंचकर अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करेगी।
एक हजार की आबादी पर एक या उससे कम टीबी मरीज का लक्ष्य
टीबी मुक्त विकासखंड के लिए निर्धारित प्रमुख मानकों में प्रति एक हजार जनसंख्या पर एक या उससे कम टीबी मरीज होना शामिल है। इसके साथ ही प्रत्येक एक हजार की आबादी में पर्याप्त संख्या में संभावित टीबी मरीजों की जांच किया जाना, उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत या उससे अधिक होना तथा सभी चिन्हित टीबी मरीजों को पोषण आहार की उपलब्धता सुनिश्चित होना भी महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल टीबी मरीजों की संख्या कम करने पर ही नहीं, बल्कि संभावित मरीजों की सक्रिय खोज और अधिक से अधिक लोगों की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि जांच के अभाव में कोई टीबी मरीज छूट न जाए।
घर-घर पहुंचकर संभावित मरीजों की हो रही स्क्रीनिंग
सोनहत विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव एवं घर-घर पहुंचकर टीबी के लक्षण वाले एवं उच्च जोखिम समूह के लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। संदिग्ध मरीजों का आवश्यकतानुसार छाती का एक्स-रे, बलगम की जांच तथा आधुनिक NAAT मशीन से मॉलिक्यूलर जांच कराई जा रही है। बीमारी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार प्रारंभ कर नियमित निगरानी की जा रही है।
इस अभियान का उद्देश्य टीबी की जल्द पहचान, समय पर उपचार और उपचार की पूर्णता सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
जनभागीदारी से बनेगा टीबी मुक्त सोनहत
टीबी मुक्त सोनहत के लक्ष्य को हासिल करने में जनभागीदारी को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूक रहें और लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना जैसे लक्षण होने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
जिला प्रशासन कोरिया ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे टीबी के प्रति जागरूकता को हर गांव और हर परिवार तक पहुंचाने में सहयोग करें तथा टीबी के संभावित मरीजों की पहचान और उपचार में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें।
टीबी मुक्त सोनहत की पहल, टीबी मुक्त कोरिया और टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जनभागीदारी और सतत प्रयासों से ही इस लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

