कॉलरी के अधिकारी की हिटलर शाही….बीमार श्रमिक को कहे अपशब्द…तानाशाह प्रबंधन ने श्रमिक का ही कर दिया ट्रांसफर…एक पक्षीय कार्रवाई से श्रमिक परेशान….

कोरिया बैकुंठपुर से कमरून निशा की खास रिपोर्ट

कॉलरी के अधिकारी की हिटलर शाही….

बीमार श्रमिक को कहे अपशब्द…

तानाशाह प्रबंधन ने श्रमिक का ही कर दिया ट्रांसफर…

एक पक्षीय कार्रवाई से श्रमिक परेशान….

जिला कोरिया के चर्चा कॉलरी ……. बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चर्चा कॉलरी में अधिकारियों की तानाशाही मनमानी पूरे चरम पर है देश की ऊर्जा आपूर्ति हेतु रात दिन अपना खून पसीना एक कर कोयला उत्पादन करने वाले श्रमवीरो का अपमान संभवत जितना चर्चा कालरी क्षेत्र में हो रहा है उतना कहीं नहीं होता होगा क्षेत्र में निरंकुश अधिकारी पूरी तरह हिटलर का रोल अदा करने में लगे हैं श्रमिकों के साथ गाली गलौज व मारपीट तो आम बात हो गई है परंतु अधिकारी संभवत यह भूल गए हैं कि जिस दिन श्रमिकों के सब्र का पैमाना टूटेगा तो फिर क्या होगा यह भविष्य के गर्त में है क्षेत्र में लाचार व बेबस श्रमिक अपमान का घूंट पीने को मजबूर है तानाशाही का दौर सिर्फ श्रमिकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब उनके निशाने पर श्रम संघों के पदाधिकारी भी हैं जबकि कोयला उत्पादन में श्रमिक और अधिकारियों के बीच श्रम संघ प्रतिनिधि की अहम भूमिका होती है इसके बावजूद यह अधिकारी श्रम संघों के पदाधिकारियों को भी नहीं बक्स रहे हैं कुछ नए नवेले नवसीखिए अधिकारी ऐसे भी हैं जिन्हें अपने पद का गुरूर है जबकि वर्षों से खदान के अंदर हरदोल मेहनत करने वाला श्रमिक का अनुभव उनसे कहीं ज्यादा होता है किंतु इन्हें सिर्फ अपने पद का अभिमान रहता है जतिन है अनुभवी श्रमिकों से सीख लेनी चाहिए गत दिनों क्षेत्र की सर्वाधिक सदस्य संख्या वाले एटक यूनियन के क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष जागृत कुर्रे जो की चर्चा आर ओ में पंप ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं वे कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज वैक्सिंग लगवाने के पश्चात अपने काम पर गए हुए थे जहां उन्हें अपनी तबीयत ठीक नहीं लगी और उन्होंने कहा कि मुझे छुट्टी दे दीजिए मैं घर जाऊंगा इस पर वहां उपस्थित अधिकारी अभिषेक कुमार भड़क गए और वरिष्ठ श्रमिक जागृत के प्रति बेहद आपत्तिजनक अपशब्दों का प्रयोग किया साथ ही उन्होंने कहा कि बहुत नेतागिरी करते हो निपटा देंगे तुमको जहां बोलना है बोलो कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता तबीयत खराब होने के बावजूद भी जागृत अपने काम पर लगे रहे इसी दौरान उन्हें चक्कर आया और वह बेसुध हो गए जिन्हें बाद में वहां उपस्थित श्रमिक साथियों के सहयोग से क्षेत्रीय चिकित्सालय चर्चा में लाकर उपचार कराया गया जागृत की तबीयत खराब होने की जानकारी के बाद भी इस अधिकारी का मन इतने में भी नहीं भरा तो उसने और नमक मिर्ची लगाकर अपने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी जिस पर प्रबंधक द्वारा श्रमिक जागृत का पक्ष लिए बिना एकतरफा कार्यवाही करते हुए श्रमिक जागृत कुर्रे के ट्रांसफर का फरमान जारी कर दिया जबकि प्रबंधन को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत आरोप पत्र जारी करने के पूर्व श्रमिक का भी पक्ष लेना चाहिए था बीमार श्रमिक के स्वास्थ्य की जानकारी होने के बावजूद प्रबंधन द्वारा तनिक भी सहानुभूति नहीं बढ़ती गई और जानबूझकर विधि विरुद्ध कार्रवाई की गई गौरतलब है कि जागृत कुर्रे विगत 35 वर्षों से चर्चा कॉलरी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं बेहद सहज सरल श्रमिक जागृत के प्रति आज तक किसी प्रकार का आरोप नहीं लगा किंतु वर्तमान में प्रबंधन द्वारा की गई कार्यवाही से जागृत मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं उन्होंने घटना की जानकारी एटक यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी दी और न्याय की मांग की

 एटक यूनियन के केंद्रीय महासचिव हरिद्वार सिंह ने कहा की इस प्रकार की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं मैं स्वयं चर्चा जाकर जांच  करूंगा

Leave a Reply

Your email address will not be published.